देहरादून में सड़क सुरक्षा नियमों की अनदेखी और शराब की दुकानों को लेकर जिला आबकारी अधिकारी केपी सिंह पर बड़ी कार्रवाई की गई है। उन्हें जिले से हटाकर आबकारी मुख्यालय अटैच कर दिया गया है।
🚨 मामला क्या है?
मार्च 2025 में देहरादून जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में निर्णय लिया गया था कि शहर की 6 शराब की दुकानें, जो सड़क हादसों और ट्रैफिक जाम का कारण बन रही थीं, उन्हें 31 जुलाई 2025 तक स्थानांतरित किया जाए। यह निर्देश प्रमुख सचिव, आबकारी विभाग द्वारा जारी किए गए थे।
लेकिन इस बीच एक शराब व्यवसायी ने उत्तराखंड हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर दी। मामले में जिला आबकारी अधिकारी केपी सिंह ने बिना किसी सक्षम अधिकारी की अनुमति के स्टैंडिंग काउंसिल को एक रिपोर्ट भेज दी, जो सड़क सुरक्षा समिति के निर्णय के खिलाफ थी।
📋 डीएम की संस्तुति पर हुई कार्रवाई
यह मामला देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल के संज्ञान में आने के बाद उन्होंने केपी सिंह के खिलाफ निलंबन की संस्तुति करते हुए शासन को जांच के लिए पत्र लिखा। इसके बाद आबकारी विभाग ने उन्हें तत्काल प्रभाव से मुख्यालय में अटैच करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
🔍 आगे क्या होगा?
आबकारी आयुक्त अनुराधा पाल ने साफ किया है कि जिलाधिकारी की संस्तुति पर जांच की जाएगी। अगर जांच में केपी सिंह की लापरवाही प्रमाणित होती है, तो निलंबन सहित कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
👤 नया डीईओ कौन?
केपी सिंह के हटाए जाने के बाद, फिलहाल मसूरी क्षेत्र के आबकारी निरीक्षक वीरेंद्र कुमार जोशी को अस्थाई रूप से देहरादून जिला आबकारी अधिकारी का कार्यभार सौंपा गया है। उन्हें कोई अतिरिक्त वेतन या भत्ता नहीं दिया जाएगा।
इस संबंध में आबकारी आयुक्त द्वारा आधिकारिक आदेश भी जारी कर दिए गए हैं।
🛑 यह पहला मामला नहीं…
यह पहली बार नहीं है जब देहरादून जिलाधिकारी ने शराब की दुकानों को लेकर आबकारी विभाग के खिलाफ सख्ती दिखाई हो। इससे पहले भी अवैध या विवादित शराब दुकानों को बंद कराने को लेकर प्रशासन और आबकारी विभाग आमने-सामने आ चुके हैं।




