त्रिवेन्द्र “लॉकडाउन” ! फेसबुक पर दर्शन, दूर से रामा रामी। यूपी मे योगी मैदान मे

देहरादून।  उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कोरोना वायरस के खतरे को देखते हुए खुद मैदान में उतरकर जिलों में दौरे कर वहां अस्पतालों का निरीक्षण कर अफसरों को मुस्तैद रहने का पाठ पढ़ा रहे है। वहीं उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री ने कोरोना वायरस के बाद संभवतः खुद को ही मुख्यमंत्री आवास में लॉकडाउन कर लिया है?
चर्चा है कि वह आवास में ही अफसरों के साथ बैठक कर रहे और जिलों में खुद उतरने के बजाए फेसबुक लाइव कर अपनी चिंता का बखान कर रहे है?
यही कारण है कि जिलों मे अधिकारी फोन उठाने को राजी नही हैं। हरिद्वार मे मरीज इलाज के लिए भटकते रह गये और दो ने तो दम तोड़  दिया लेकिन सीएमओ सरोज नैथानी फोन काटती रही। वहीं नई टिहरी मे नव प्रसूता महिला इलाज के भटकती रही। कई जगह डाक्टर लाॅकडाउन या नदारद हो गये हैं। कोई मरीज नब्ज पकड़े को राजी नहीं है। दूर से ही कह रहे हैं “ले जाओ ले जाओ।” जरा पता कीजिए पीपीपी मोड वाले अस्पतालों के डाक्टर कहाँ हैं आजकल !
अस्पतालों से नदारद डाक्टर 
 यूपी के मुख्यमंत्री योगी खुद जिलों में अपनी टीम के साथ जाकर अस्पतालों में हो रहे इलाज का जायजा ले रहे है और सख्त अल्टीमेटम दे रहे है कि अगर किसी ने भी इस विपदा की घड़ी में लापरवाही दिखाने की कोशिश की तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। और उत्तराखंड के हाल देख लीजिए।
इसीलिए अफसर भी नदारद
एक ओर जहां कोरोना वायरस को लेकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री काफी गंभीर नजर आ रहे है और मैदान में कूद रखे हैं, वहीं दूसरी ओर उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने तो इस घातक बीमारी के दौरान संभवतः खुद को ही लॉकडाउन कर रखा है और यही कारण माना जा रहा है कि वह मुख्यमंत्री आवास से बाहर न आकर वहीं पर मंत्रियों और अफसरों की बैठकें ले रहे है और अवाम की चिंता जताने के लिए वह फेसबुक के ही भरोसे बैठे हुए दिखाई दे रहे है?
बता दें कि उत्तराखण्ड का स्वास्थ्य मंत्रालय भी मुख्यमंत्री के पास ही है। हालांकि यह राहत की बात है कि कोरोना के लिए  आवश्यक सेवाएं देने के लिए स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी दिन रात मरीजों का ख्याल रख रहे है किंतु उनके विभाग के मुखिया रण के इस मैदान से कोसों दूर नजर  आ रहे है?
13 जनपदों वाले इस छोटे राज्य उत्तराखण्ड में स्वास्थ्य सुविधाओं का हाल किसी से छिपा नहीं है और पिछले वर्ष जब डेंगूं ने अपना कहर बरपाया था तो उस समय भी सरकार चारों खाने चित्त ही नजर आई थी।
 वहीं अब तो कोरोना वायरस जैसी वैश्विक महामारी से उत्तराखण्ड का सामना हो रहा है और ऐसे सरकार के मुखिया का आवाम को मझधार में छोड़ खुद को मुख्यमंत्री आवास में लॉकडाउन करना इस ओर इशारा कर रहा है कि मानो कोरोना से सबसे ज्यादा खतरा उन्हें ही सता रहा हो?

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