महामारी में भी घोटाला : सैनिटाइजर के ब्लीचिंग पाउडर से मच्छी मार रहे गांववाले। एक की मौत 

कोरोना महामारी के चलते आजकल पूरे उत्तराखंड में सरकारी तंत्र,जनप्रतिनिधि व अनेक NGO लगातार मास्क,सेनेटाइजर (ब्लीचिंग पाउडर) वितरित कर रहे हैं।
देखने में आया है कि जिन जनप्रतिनिधियों को सैनिटाइजर हेतु ब्लीचिंग पॉउडर दिया गया वे जनप्रतिनिधि उस पॉउडर से नदी में मच्छी मार रहे हैं। पौड़ी जिले मे कत्त्याड नदी, मंदाल नदी नयार नदी में आजकल मछली मार ब्लीचिंग पॉउडर से मछली मारने पर व्यस्त हैं, जिनको संरक्षण होमगार्ड व जंगलात वाले दे रहे हैं।
दो दिन पूर्व रिखणीखाल ब्लाक के गाड़ियों गाँव में घटी घटना में धनवीर सिंह रावत (23) पुत्र सोबन सिंह रावत के लड़के की मौत की घटना भी इसका एक उदाहरण है। कत्त्याड नदी में मच्छी मारते वक्त यह घटना घटी थी, जिसमें मुछेल गाँव मेलधार गाड़ियों क्षेत्र के कुछ जनप्रतिनिधि भी शामिल थे।
पहाड़ के गाँवों में विकासखण्ड स्तर से ये सामग्री मुफ़्त में बांटे जाने का प्रावधान है, कुछ विकासखण्डों में ये सामग्री ग्राम प्रधान व क्षेत्र पंचायत सदस्य के जिम्मे है। विधायक अपने-अपने मंडल अध्यक्षों पंचायत पार्टी कार्यकर्ताओं व आशा कर्मियों को यह सामग्री भेंट कर रहे है। जिसे मुफ़्त में उसी दिन वितरित करना होता है।
कुछ विकासखंडों में यह सामग्री ग्राम सभा प्रधान के द्वारा राज्य वित्त के बजट से बांटे जा रहे हैं।
जनपद पौड़ी के विकासखंड रिखणीखाल में विकास खण्ड अधिकारी शिवप्रसाद थपड़ियाल का कहना है कि एक मास्क की कीमत 25₹ है और गौर करने वाली बात यह है कि ये मास्क सर्जिकल मास्क है जो एक बार इस्तेमाल करने के बाद दुबारा इस्तेमाल में नही लाई जाएगी। बाज़ार में  इस मास्क का खुदरा मूल्य 10₹ है व होलसेल रेट 4 से 5₹ मात्र।
विगत अनेक दिनों से लैंसडाउन विधायक महंत दिलीप सिंह रावत अपने विधानसभा क्षेत्र में लगातार जनता को जागरुक कर रहे है 15 लाख के आपदा राहत पैकेज के साथ विधायक क्षेत्र में करोना से लड़ने हेतु जरूरी सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं। विधायक के फेसबुक पोस्ट से संज्ञान में आया है कि रिखणीखाल विकासखण्ड के प्रत्येक ग्राम सभा में, 10 लीटर सेनेटाइजर, 25 किलो ब्लीचिंग, 200 मास्क, 50 ग्लब्ज और स्प्रे मशीन दी जा रही है।
 हालांकि विधायक दिलीप सिंह रावत के क्षेत्र मे जिस अनदेखी से राहत सामग्री बंट रही है, इस हिसाब से यह सिर्फ 15 लाख की विधायक निधि को ठिकाने लगाने का कार्य बनकर रह सकता है।
(Pic symbolic)

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