भाजपा विधायक और पत्नी के बैंक खाते में पहुंची मनरेगा की धन राशि, जांच के आदेश

उत्तरकाशी जिले की पुरोला विधानसभा क्षेत्र से भारतीय जनता पार्टी के विधायक दुर्गेश्वर लाल और उनकी पत्नी निशा के बैंक खातों में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) की मजदूरी राशि जमा होने का मुद्दा राज्य स्तर पर बहस का केंद्र बन गया है। विकासखंड अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह राशि उनके पुराने जॉब कार्ड के आधार पर ट्रांसफर की गई थी। वहीं, विधायक ने इसे अपनी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की एक सुनियोजित योजना बताया है। इस बीच, खंड विकास अधिकारी शशि भूषण बिंजोला ने जारी की गई पूरी राशि की वसूली करने की घोषणा की है।

राष्ट्रीय स्तर पर जहां मनरेगा योजना का नाम परिवर्तन कांग्रेस पार्टी में असंतोष का कारण बना हुआ है, वहीं जिले की पुरोला सीट से भाजपा विधायक दुर्गेश्वर लाल और उनकी पत्नी के खातों में योजना के तहत दिहाड़ी भुगतान का प्रकरण इन दिनों सुर्खियों में है।

वास्तव में, वर्ष 2022 में भाजपा की ओर से चुनाव जीतकर विधायक बने दुर्गेश्वर लाल का पहले मनरेगा जॉब कार्ड तैयार किया गया था। उस कार्ड के माध्यम से उन्हें और उनकी पत्नी को अतीत में कई बार योजना के तहत भुगतान प्राप्त हुआ। हालांकि, हाल ही में विधायक पद पर रहते हुए उनके जॉब कार्ड पर पति-पत्नी दोनों को मजदूरी भुगतान का खुलासा हुआ है।

मनरेगा के आधिकारिक ऑनलाइन पोर्टल से प्राप्त विवरण के अनुसार, जून 2022 में विधायक की पत्नी निशा को रेकचा के साझा मार्ग पर पीसीसी खड़ंजा निर्माण का कार्य आवंटित दिखाया गया है। इसी तरह, पिछले वर्ष अगस्त-सितंबर 2024 तथा नवंबर 2024 में उन्हें दो अवसरों पर क्रमशः बाजुड़ी टोक में पीसीसी निर्माण और समलाड़ी टोक में पौधारोपण का कार्य सौंपा गया। जबकि चालू वर्ष में स्वयं विधायक दुर्गेश्वर लाल को पिनेची टोक में भूमि सुधार कार्य में रोजगार प्रदान किया गया दिखाया गया है।

पोर्टल पर विधायक पद पर रहते हुए तीन परियोजनाओं के लिए 5,214 रुपये का भुगतान दर्ज है, जबकि वर्ष 2021 से 2025 तक की 11 परियोजनाओं में पति-पत्नी दोनों के खातों में कुल 22,962 रुपये जमा होना प्रदर्शित है। इस विषय पर शुक्रवार को ब्लॉक कार्यालय में क्षेत्रीय मनरेगा सहायक यशवंत से पूछताछ की गई, तो उन्होंने बताया कि उनके किसी भी उपस्थिति रजिस्टर (मस्टरोल) पर हस्ताक्षर नहीं हैं और न ही कार्यालय में संबंधित फाइलें या रिकॉर्ड उपलब्ध हैं।

बिचौलियों के कारोबार बंद होने से वे मुझे निशाना बना रहे हैं। मनरेगा का उपस्थिति रजिस्टर तब तक जारी नहीं होता जब तक कार्य करने वाले व्यक्ति के हस्ताक्षर न हों। यह मेरी छवि को धूमिल करने की साजिश है। विधायक बनने से पहले मेरा जॉब कार्ड अवश्य था।

-दुर्गेश्वर लाल, विधायक, पुरोला विधानसभा-

इस मुद्दे पर ध्यान दिया गया है। शनिवार को आराकोट में सार्वजनिक सेवा शिविर के पश्चात सभी संबंधित कर्मचारियों को बुलाकर विवरण प्राप्त किया जाएगा। उसके बाद दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति से मनरेगा योजना के अंतर्गत प्रदान की गई पूरी राशि की वसूली की जाएगी।

-शशि भूषण बिंजोला, खंड विकास अधिकारी, मोरी

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