वैश्विक और घरेलू बाजारों में सप्ताह की शुरुआत गिरावट के साथ हुई, जहां सोने और चांदी की कीमतों में कमजोरी दर्ज की गई। अमेरिकी मुद्रा में आई मजबूती और महंगाई से जुड़े ताजा आंकड़ों के बाद निवेशकों की रणनीति में बदलाव देखने को मिला, जिसका असर सीधे तौर पर कीमती धातुओं पर पड़ा।
MCX पर ताजा भाव
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज, MCX पर अप्रैल डिलीवरी वाले सोने में हल्की नरमी देखी गई। शुरुआती सत्र में पीली धातु 0.56 प्रतिशत लुढ़ककर 1,55,023 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई।
वहीं, मार्च कॉन्ट्रैक्ट की चांदी में अधिक दबाव नजर आया। यह 1.99 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2,39,501 रुपये प्रति किलोग्राम पर कारोबार करती दिखाई दी।
अमेरिकी आंकड़ों का असर
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स में 0.10 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई, जिससे यह 97 के स्तर तक पहुंच गया। जनवरी में अमेरिका का उपभोक्ता मूल्य सूचकांक, CPI मासिक आधार पर 0.2 प्रतिशत बढ़ा, जबकि सालाना दर 2.4 प्रतिशत रही। अनुमान के अनुरूप आए इन आंकड़ों ने डॉलर को सहारा दिया।
आमतौर पर जब डॉलर मजबूत होता है, तो अन्य मुद्राओं में निवेश करने वालों के लिए डॉलर आधारित सोना और चांदी महंगे हो जाते हैं, जिससे मांग में नरमी आती है और कीमतों पर दबाव बनता है।
आगे की दिशा और तकनीकी संकेत
विश्लेषकों का मानना है कि मजबूत श्रम बाजार और नियंत्रित महंगाई दर के चलते अमेरिकी केंद्रीय बैंक, फेडरल रिजर्व निकट भविष्य में ब्याज दरों को यथावत रख सकता है।
तकनीकी चार्ट के अनुसार, सोने के लिए 1,54,000 रुपये का स्तर महत्वपूर्ण सपोर्ट माना जा रहा है, जबकि 1,56,800 रुपये के आसपास रुकावट देखी जा रही है।
चांदी के लिए 2,38,800 रुपये का स्तर प्रमुख सहारा बना हुआ है।
दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य
हालांकि फिलहाल बाजार में दबाव दिख रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का आकलन है कि लंबी अवधि में कीमती धातुओं की दिशा सकारात्मक बनी रह सकती है। वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियां, केंद्रीय बैंकों की निरंतर खरीद और संप्रभु बांडों में घटती दिलचस्पी जैसे कारक इसे समर्थन दे सकते हैं।
बाजार सहभागियों की निगाह अब फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की बैठक के मिनट्स, अमेरिकी जीडीपी आंकड़ों और रूस-यूक्रेन युद्ध तथा अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच कच्चे तेल के उतार-चढ़ाव पर टिकी है।
गौरतलब है कि चांदी अपनी रिकॉर्ड ऊंचाई 121 डॉलर से नीचे आने के बाद फिलहाल सुधार के दौर से गुजर रही है।



