पिथौरागढ़। सुशील खत्री
सीमांत में श्रमिक और परिवार के हित के लिए चलाई जा रही श्रम विभाग की योजनाओं की हकीकत सामने आई । एक श्रमिक की पत्नी ने पति को खो दिया। निर्धन पत्नी को श्रम विभाग की लापरवाही से अपने हक से वंचित होना पड़ा ।
नगर के धर्मशाला निवासी संदीप ने 12 नवंबर 2024 को श्रम विभाग में श्रमिक कार्ड के लिए पंजीकरण कराया। पंजीकरण के महज 4 दिन बाद ही उसकी मौत हो गई और निर्धन परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट गया।
नियमों के मुताबिक, श्रम विभाग में पंजीकृत श्रमिक की मौत के बाद उसकी पत्नी को दो लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिलती है। यह तभी संभव था जब पत्नी पति की मौत के एक साल के भीतर आवेदन करे।
भवानी आर्थिक सहायता के लिए आवेदन करने के लिए मृतक पति का श्रमिक कार्ड मांगने श्रम कार्यालय और सुविधा केंद्र के चक्कर काटती रही लेकिन हर बार उसे निराशा हाथ लगी। उसे यह कहकर वापस भेज दिया गया कि अब तक श्रम कार्ड नहीं बना है।
पति की तरफ से किए गए आवेदन के बाद उनका पंजीकरण तो कर दिया गया लेकिन श्रम कार्ड कहां गायब हुआ यह किसी को पता नहीं। पति का श्रम कार्ड न मिलने से भवानी को आर्थिक सहायता के लाभ से वंचित होना पड़ा है।
हैरानी की बात तब है जब उनके देवर सुशील खत्री ने दस्तावेज खंगाले गए तो उनमें साफ तौर पर उनके पति की श्रमिक के तौर पर पंजीकरण संख्या दर्ज है।
इस लापरवाही के चलते भवानी मुश्किल हालात में परिवार का पालन-पोषण करने के लिए मजबूर है। वहीं इस लापरवाही का जवान जिम्मेदार अधिकारियों के पास भी नहीं है।
कार्ड दिया नहीं, निरस्त करने के लिए मांग दिया प्रार्थना पत्र
श्रम विभाग के कारनामे से सभी हैरान हैं। पति की मौत के दो साल तक श्रम विभाग के चक्कर काटती रही भवानी को टालते हुए उन्हें श्रम कार्ड नहीं दिया । जिम्मेदार यही कहते रहे उनका श्रम कार्ड बना ही नहीं। जब भविष्य में सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने की उम्मीद में भवानी अपना श्रम कार्ड बनाने कार्यालय और सुविधा केंद्र पहुंची तो उनसे पति का कार्ड निरस्त करने का प्रार्थना पत्र लिखवा लिया। विभाग जब खुद मान रहा है कि मृतक संदीप खत्री का श्रम कार्ड बना ही नहीं तो उनकी पत्नी से इसे निरस्त करने का प्रार्थना पत्र लिखवाने की बात कई सवाल खड़े कर रही है।
पति के निधन के बाद मैं कई बार श्रम सुविधा केंद्र गई लेकिन उनका श्रम कार्ड नहीं दिया गया। ऐसे में मुझे आर्थिक सहायता से वंचित होना पड़ा है। अब मेरा खुद का श्रम कार्ड बनाने की बात कही जा रही है। जब मैं अपना श्रम कार्ड बनाने के लिए श्रम सुविधा केंद्र पहुंची तो वहां मुझसे पति का श्रम कार्ड निरस्त करवाने का प्रार्थना पत्र लिखवाया गया है।
भवानी , धर्मशाला लाइन
श्रम विभाग ने जो दस्तावेज मुझे दिए हैं उसमें मेरे चचेरे भाई की पंजीकरण संख्या दर्ज है। यदि पंजीकरण हुआ है तो जाहिर है कि उनका श्रम कार्ड भी बना होगा। इतनी बड़ी लापरवाही के चलते एक श्रमिक की पत्नी को अपने हक से वंचित होना पड़ा है जो गंभीर है।
सुशील खत्री, पार्षद, पुरानी बाजार, पिथौरागढ़
वर्ष 2023-24 में श्रम विभाग के पोर्टल पर साइबर अटैक हुआ। हो सकता है कि इसी कारण पोर्टल से संदीप खत्री के दस्तावेज उड़ गए। किसी भी श्रमिक की मृत्यु के एक साल के भीतर ही उनके पारिवारिक सदस्य को आर्थिक सहायता के लिए आवेदन करना होता है। अब संबंधित महिला को आर्थिक सहायता नहीं मिल सकती है।
दीपक कुमार, सहायक श्रम आयुक्त, श्रम विभाग, पिथौरागढ़
संदीप का श्रम कार्ड के लिए आवेदन पोर्टल पर ही पड़ा रह गया। देहरादून से श्रम कार्ड बनते हैं। अब संबंधित महिला को अपना श्रम कार्ड बनाने के लिए नया आवेदन करना होगा।
प्रदीप बिष्ट, श्रम प्रवर्तन अधिकारी, पिथौरागढ़






