उत्तराखंड पर 80 हजार करोड़ का कर्ज! विकास या बढ़ता आर्थिक बोझ?

देहरादून। आर्थिक सर्वेक्षण के सकारात्मक संकेतों के बीच उत्तराखंड की वित्तीय स्थिति का एक चिंताजनक पहलू भी सामने आया है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक राज्य पर इस समय 80 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है। स्थिति यह है कि राज्य की आय का बड़ा हिस्सा इस कर्ज के ब्याज और भुगतान में खर्च […]

देहरादून।

आर्थिक सर्वेक्षण के सकारात्मक संकेतों के बीच उत्तराखंड की वित्तीय स्थिति का एक चिंताजनक पहलू भी सामने आया है। ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक राज्य पर इस समय 80 हजार करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है। स्थिति यह है कि राज्य की आय का बड़ा हिस्सा इस कर्ज के ब्याज और भुगतान में खर्च हो रहा है।

हालांकि सरकार का दावा है कि पिछले चार वर्षों में बाजार से उधार लेने की रफ्तार में कमी आई है, लेकिन इसके बावजूद कुल कर्ज का आकार अब भी चिंता का विषय बना हुआ है।

सरकार का कहना है कि विकास परियोजनाओं के लिए लिया गया कर्ज अर्थव्यवस्था की सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा होता है। प्रेस वार्ता के दौरान जब राज्य पर बढ़ते कर्ज के बारे में सवाल पूछा गया तो प्रमुख सचिव (नियोजन) आर. मीनाक्षीसुंदरम ने कहा कि किसी भी राज्य के विकास में कर्ज महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक समय तमिलनाडु और महाराष्ट्र जैसे बड़े राज्य भी कर्ज के दबाव से जूझ रहे थे, लेकिन आज वही राज्य कई क्षेत्रों में अग्रणी बनकर उभरे हैं। उनका कहना था कि यदि कर्ज विकास कार्यों में लगाया जाए तो इसे नकारात्मक नहीं माना जाना चाहिए।

प्रमुख सचिव ने यह भी बताया कि राज्य में विभिन्न क्षेत्रों में लगातार प्रगति हो रही है। इसी का परिणाम है कि राष्ट्रीय सतत विकास लक्ष्य यानी एसडीजी इंडेक्स में वर्ष 2021-22 के दौरान उत्तराखंड को चौथा स्थान मिला था।

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