मोरी बाजार में वन भूमि पर किया जा रहा था शौचालय निर्माण, विभाग ने किया ध्वस्त 

मोर ब्लाक मुख्यालय अंतर्गत मोरी बाजार में वन भूमि पर बिना भूमि हस्तांतरण के किए जा रहे शौचालय निर्माण को टौंस वन प्रभाग की टीम ने ध्वस्त कर दिया। यह कार्रवाई वन विभाग की ओर से दूसरी बार की गई है। तीन सप्ताह पूर्व लौह सेतू के पास वन भूमि पर शौचालय का निर्माण किया […]

मोर ब्लाक मुख्यालय अंतर्गत मोरी बाजार में वन भूमि पर बिना भूमि हस्तांतरण के किए जा रहे शौचालय निर्माण को टौंस वन प्रभाग की टीम ने ध्वस्त कर दिया।

यह कार्रवाई वन विभाग की ओर से दूसरी बार की गई है। तीन सप्ताह पूर्व लौह सेतू के पास वन भूमि पर शौचालय का निर्माण किया जा रहा था, जिसे वन अधिनियम का उल्लंघन मानते हुए हटाया गया।

जिला पंचायत सदस्य पवन दास ने वन विभाग की कार्रवाई पर नाराजगी जताई और कहा कि शौचालय जनहित को ध्यान में रखकर उनकी देखरेख में बताया जा रहा था।उन्होंने कहा कि यदि विभाग को आपत्ति थी तो निर्माण के समय सूचना दी जानी चाहिए थी। बिना पूर्व नोटिस तोड़े जाने से लोगों की मूलभूत सुविधा प्रभावित हुई।

क्या कहते हैं जन प्रतिनिधि

ब्लॉक प्रमुख रणदेव राणा ने कहा कि शौचालय जनता की मूलभूत आवश्यकता से जुड़ा संवेदनशील विषय है।मोरी बाजार में इसकी आवश्यकता को देखते हुए शासन व प्रशासन को संवाद के माध्यम से समाधान निकालकर निर्माण सुनिश्चित करना चाहिए।

 

विधायक दुर्गेश लाल ने कहा कि दूरदराज क्षेत्रों से आने-जाने वाले ग्रामीण और पर्यटकों के लिए शौचालय का निर्माण आवश्यक है।

उन्होंने वन विभाग से वार्ता कर जनहित में निर्णय की अनुमति लेने की बात कही।

क्या कहते हैं अधिकारी

सिंगतुर रेंज के रेंज अधिकारी अंचल गौतम ने बताया कि वन आरक्षित चंणागु कक्ष संख्या-7 में बिना वन भूमि स्थानांतरण के अतिक्रमण के प्रयास को वन अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत विधिक कार्रवाई करते हुए विफल कर दिया गया।

 

बहरहाल वन भूमि की लीज पर अधिकांश मोरी बाजार बसा है वहीं सड़क किनारे वन भूमि पर कब्जा कर कई अवैध निर्माण भी हुए है। लेकिन तब विभाग चैन की नींद सोता रहा, समय रहते कोई उचित कार्रवाई न करने पर अब अवैध निर्माण हटाना वन विभाग के लिए टेठी खीर बन गया है। सूत्र बताते हैं कि वन भूमि पर किए गए अवैध कब्जे में वन विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारी भी पिछे नहीं है।लेकिन जनहित में सार्वजनिक शौचालय निर्माण के लिए वन विभाग का भूमि हस्तांतरण करने से परहेज़ करना जनता के गले नहीं उतर रहा।

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