13 साल से खाली लोकायुक्त पद पर घमासान, आरआरपी ने सरकार को घेरा, आमरण अनशन की चेतावनी

राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी ने उत्तराखंड सरकार को सौंपा ज्ञापन, लोकायुक्त गठन की मांग तेज; नहीं मानी तो शुरू होगा उग्र आंदोलन

 

देहरादून, 30 जनवरी 2026: उत्तराखंड में सशक्त और स्वतंत्र लोकायुक्त के गठन की लंबित मांग को लेकर राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी (आरआरपी) ने आज मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा। पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव प्रसाद सेमवाल ने तहसीलदार सुरेश सेमवाल के माध्यम से यह ज्ञापन मुख्यमंत्री कार्यालय को प्रेषित किया। ज्ञापन में पार्टी ने राज्य सरकार से चुनावी वादों को तत्काल पूरा करने और लोकायुक्त की नियुक्ति करने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि यदि सरकार जल्द कार्रवाई नहीं करती, तो पार्टी मजबूरन प्रदेशव्यापी उग्र आंदोलन शुरू करेगी।

 

ज्ञापन में पार्टी ने कहा कि राज्य सरकार ने विभिन्न चुनावी घोषणा-पत्रों में बार-बार सशक्त लोकायुक्त गठन का वादा किया है, लेकिन आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। माननीय हाईकोर्ट द्वारा भी सरकार को इस संबंध में कई निर्देश जारी किए गए, किंतु उनकी अवहेलना की जा रही है। इससे राज्य की जनता, विशेष रूप से भ्रष्टाचार से प्रभावित नागरिक, अत्यंत आहत और निराश हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि लोकायुक्त के अभाव में भ्रष्टाचार बढ़ता जा रहा है, और लोकायुक्त कार्यालय के नाम पर अनावश्यक व्यय हो रहा है, जो जनता के करों का दुरुपयोग है।

 

राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिव प्रसाद सेमवाल ने ज्ञापन सौंपने के बाद कहा, “उत्तराखंड की जनता भ्रष्टाचार मुक्त शासन की आकांक्षा रखती है। लोकायुक्त का गठन न केवल संवैधानिक आवश्यकता है, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रभावी हथियार भी। यदि सरकार अपने वादों पर खरी नहीं उतरती और तत्काल लोकायुक्त की नियुक्ति नहीं करती, तो पार्टी शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ आंदोलन छेड़ने को मजबूर होगी। हम जनहित में आवश्यक कदम उठाएंगे।”

 

ज्ञापन में लोकायुक्त को पूर्ण स्वतंत्रता, आवश्यक शक्तियां और संसाधन प्रदान करने की मांग की गई है ताकि भ्रष्टाचार के मामलों की निष्पक्ष जांच हो सके। पार्टी के लोकायुक्त आंदोलन के संयोजक परमानंद बलोदी और सुमन राम बडोनी ने भी इस मुद्दे पर जोर दिया।

 

ज्ञापन में स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि मांग पूरी नहीं हुई, तो पार्टी आंदोलन को और तेज करेगी, जिसमें आमरण अनशन और अन्य कड़े कदम शामिल हो सकते हैं। पार्टी ने राज्य सरकार से अपील की है कि वह इस चेतावनी को गंभीरता से ले और जनता के हित में तुरंत कार्रवाई करे।

 

यह मुद्दा उत्तराखंड में लंबे समय से चर्चा में है, जहां 2013 से लोकायुक्त पद खाली पड़ा है और भ्रष्टाचार निरोधक व्यवस्था पर सवाल उठते रहे हैं। राष्ट्रवादी रीजनल पार्टी का यह कदम राज्य में भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन को नई गति प्रदान कर सकता है।

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