जनता की चौखट पर सख्ती, फर्जीवाड़े पर प्रहार: हल्द्वानी जनसुनवाई में कमिश्नर दीपक रावत के बड़े फैसले

हल्द्वानी। मुख्यमंत्री के आयुक्त एवं सचिव दीपक रावत ने हल्द्वानी स्थित कैंप कार्यालय में आयोजित जनता मिलन, जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान आम लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और कई मामलों में तत्काल कार्रवाई के निर्देश जारी किए। कार्यक्रम में भूमि विवाद, धोखाधड़ी, अवैध निर्माण, पारिवारिक झगड़े, पेयजल और बिजली से जुड़ी शिकायतें, स्थायी […]

हल्द्वानी। मुख्यमंत्री के आयुक्त एवं सचिव दीपक रावत ने हल्द्वानी स्थित कैंप कार्यालय में आयोजित जनता मिलन, जनसुनवाई कार्यक्रम के दौरान आम लोगों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और कई मामलों में तत्काल कार्रवाई के निर्देश जारी किए। कार्यक्रम में भूमि विवाद, धोखाधड़ी, अवैध निर्माण, पारिवारिक झगड़े, पेयजल और बिजली से जुड़ी शिकायतें, स्थायी निवास प्रमाण पत्र, कब्जा दिलाने और लंबित भुगतान जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे सामने आए।

 

जनसुनवाई के दौरान उधम सिंह नगर जिले में ओबीसी वर्ग के लोगों द्वारा अनुसूचित जाति के फर्जी प्रमाण पत्र बनाए जाने की शिकायत पर आयुक्त ने कड़ा रुख अपनाया। मामले को गंभीर मानते हुए उन्होंने अपर जिलाधिकारी उधम सिंह नगर को तलब कर विस्तृत जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।

 

38वें राष्ट्रीय खेलों में सेवाएं दे चुके 85 वालंटियरों के लगभग 36 लाख रुपये के मानदेय का भुगतान लंबित होने पर भी आयुक्त ने नाराजगी जताई। संबंधित कंपनी को 14 फरवरी तक भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए, साथ ही चेतावनी दी गई कि तय समय सीमा तक भुगतान न होने की स्थिति में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।

 

बिजली चोरी की शिकायतों पर यूपीसीएल को निर्देशित किया गया कि संवेदनशील क्षेत्रों में संयुक्त जांच अभियान चलाकर दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। वहीं खनस्यू निवासी मुकुल सिंह ऐरी द्वारा पेयजल आपूर्ति बाधित होने की शिकायत पर आयुक्त के निर्देश के बाद जल संस्थान ने मौके पर पहुंचकर जलापूर्ति बहाल कर दी।

 

इसके अलावा रुद्रपुर क्षेत्र से भूमि कब्जा न मिलने, खाता-खतौनी में नाम दर्ज कराने, पैतृक संपत्ति विवाद, बिजली और पानी के कनेक्शन, तथा लंबित वेतन भुगतान से जुड़ी शिकायतों पर संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए।

 

आयुक्त दीपक रावत ने कहा कि नागरिक अपनी समस्याओं का समाधान प्राथमिक स्तर पर तहसील और उपजिलाधिकारी कार्यालयों में कराने का प्रयास करें। यदि वहां समाधान न हो, तो उच्च अधिकारियों तक शिकायत पहुंचाई जाए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनसमस्याओं के निस्तारण में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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