सीमांत जिला पिथौरागढ़ में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति पहले से ही चुनौतियों से घिरी हुई है। कई अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी, अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव मरीजों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है। अब हालात ऐसे हो गए हैं कि आपातकालीन स्थिति में सहारा बनने वाली 108 एंबुलेंस सेवा भी खुद संकट में दिखाई दे रही है।
जिले में कई एंबुलेंस इतनी पुरानी और जर्जर हो चुकी हैं कि वे रास्ते में ही खराब हो जाती हैं। कई बार मरीजों को अस्पताल पहुंचाने से पहले ही वाहन बीच सड़क पर खड़े हो जाते हैं। इससे गंभीर मरीजों और गर्भवती महिलाओं के लिए स्थिति और अधिक जोखिम भरी बन रही है।
दरअसल पिथौरागढ़ में कुल 18 एंबुलेंस संचालित हैं। इनमें से 8 एंबुलेंस ऐसी हैं जो निर्धारित मानक के अनुसार अपना तय सफर पूरा कर चुकी हैं। नियमों के मुताबिक एंबुलेंस को अधिकतम 10 वर्ष या लगभग 2.5 लाख किलोमीटर तक ही सेवा में रखा जाना चाहिए, लेकिन बजट और संसाधनों की कमी के कारण इन्हें अब भी सड़कों पर चलाया जा रहा है।
जिले की उबड़-खाबड़ सड़कों पर चलने के कारण इन पुरानी गाड़ियों की स्थिति और खराब हो गई है। कई बार एंबुलेंस रास्ते में ही जवाब दे देती हैं। हाल के दिनों में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं जो इस व्यवस्था की वास्तविक स्थिति को उजागर करती हैं।
पिछले एक सप्ताह के भीतर जौलजीबी से संचालित एंबुलेंस धारचूला हाईवे पर सतगढ़ के पास खराब होकर खड़ी हो गई थी। वहीं मुनस्यारी क्षेत्र की एंबुलेंस खराब होने के कारण करीब दो महीने तक पीएचसी परिसर में खड़ी रही, जिसे काफी प्रयासों के बाद ही ठीक किया जा सका। इसके अलावा बेरीनाग क्षेत्र में एक एंबुलेंस बाजार के बीचों-बीच बंद हो गई थी, जिसे कर्मचारियों और स्थानीय लोगों की मदद से धक्का लगाकर चालू किया गया।
वर्तमान में जिले में केवल 10 एंबुलेंस ही ऐसी हैं जो मानकों के अनुरूप बेहतर स्थिति में मानी जा रही हैं। इन वाहनों का उपयोग भी अधिकतर मरीजों को हल्द्वानी जैसे हायर सेंटर तक रेफर करने के लिए किया जाता है। रोजाना करीब 3 से 4 एंबुलेंस जिले से बाहर रहने के कारण स्थानीय स्तर पर आने वाली आपातकालीन कॉल के समय कई बार 108 सेवा उपलब्ध नहीं हो पाती।
जिला प्रभारी 108 आपातकालीन सेवा भास्कर शर्मा के अनुसार, पिथौरागढ़ जिले की 8 एंबुलेंस ढाई लाख किलोमीटर की सीमा पार कर चुकी हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि नए वित्तीय वर्ष में नई एंबुलेंस मिलने के बाद व्यवस्था में सुधार हो सकेगा। फिलहाल मरीजों को हायर सेंटर भेजने के दौरान भी एंबुलेंस की कमी चुनौती बनी हुई है।




