बड़कोट, उत्तरकाशी। 7 मई 2026
नीरज उत्तराखंडी
चारधाम यात्रा की दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही खरसाली-यमुनोत्री रोपवे परियोजना भूमि हस्तांतरण की स्वीकृति न मिलने के कारण अधर में लटक गई है। प्रदेश सरकार ने नवंबर 2024 में इस महत्वाकांक्षी परियोजना को पीपीपी मोड पर करीब 170 करोड़ रुपये की लागत से शुरू किया था, लेकिन शुरुआती कार्यों के बाद से निर्माण कार्य ठप पड़ा हुआ है।
परियोजना के तहत खरसाली में टर्मिनल निर्माण के लिए भूमि समतलीकरण और दीवार निर्माण का कार्य किया गया था, लेकिन इसके बाद करीब एक वर्ष से साइट पर कोई प्रगति नहीं हो सकी है। तकनीकी सर्वे के दौरान प्रस्तावित दस टावरों में से चार टावरों को यमुना नदी के दूसरी ओर स्थापित करने का सुझाव दिया गया था। इसके लिए भूमि भी चयनित कर ली गई और वन स्वीकृति भी प्राप्त हो चुकी है, लेकिन भूमि हस्तांतरण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।
करीब 3.9 किलोमीटर लंबी प्रस्तावित इस रोपवे परियोजना में दो टर्मिनल और दस टावर बनाए जाने हैं। रोपवे के शुरू होने पर खरसाली से यमुनोत्री धाम तक की लगभग छह किलोमीटर की पैदल दूरी मात्र 15 मिनट में पूरी की जा सकेगी। इसे चारधाम यात्रा को सुगम और आधुनिक बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि रोपवे निर्माण से क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। ग्रामीणों का आरोप है कि शासन-प्रशासन की धीमी कार्यप्रणाली के कारण परियोजना लगातार विलंब का शिकार हो रही है। उनका कहना है कि यह योजना यमुनाघाटी के आर्थिक विकास के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इस संबंध में जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने बताया कि यूटीडीबी से प्राप्त अंतिम रिपोर्ट के अनुसार चार टावरों के लिए भूमि हस्तांतरण आवश्यक है। इसके लिए कैबिनेट में प्रस्ताव भेजा गया है और स्वीकृति मिलते ही निर्माण कार्य दोबारा शुरू कर दिया जाएगा।




