उत्तरकाशी 7 मई 2026/नीरज उत्तराखंडी
यमुनोत्री पैदल मार्ग पर कार्यरत मजदूरों और घोड़ा-खच्चर संचालकों की समस्याएं भी लगातार बनी हुई हैं। जानकीचट्टी से यमुनोत्री तक करीब छह किलोमीटर लंबे पैदल मार्ग पर हर वर्ष लगभग 4000 मजदूर और 3000 घोड़ा-खच्चर संचालक कार्य करते हैं, जो जिला पंचायत को करोड़ों रुपये का राजस्व देते हैं। इसके बावजूद उनके लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई गई हैं।
यमुनोत्री में बने घोड़ा पड़ाव में जगह की भारी कमी बनी हुई है, जबकि मजदूरों के लिए बनाए गए कमरों में मूलभूत सुविधाओं का अभाव है। मजबूरी में मजदूरों को धूप और बारिश के बीच खुले आसमान के नीचे समय बिताना पड़ता है।
युवा मंगल सिंह रावत, मोहन लाल और मजदूर हितों से जुड़े महावीर सिंह पंवार ने कहा कि सरकार और जिला पंचायत मजदूरों व पशु संचालकों से सुविधा शुल्क तो वसूलती है, लेकिन बदले में उन्हें सुरक्षित ठिकाने और आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध नहीं कराई जातीं। उन्होंने यात्रा मार्ग पर मजदूरों और पशुओं के लिए बेहतर सुविधाएं विकसित करने की मांग उठाई है।




