बड़ी खबर: 15 वर्षों से अधूरा पड़ा जूनियर हाईस्कूल भवन, फाइल भी गायब। दांव पर बच्चों का भविष्य

मोरी (उत्तरकाशी), मई 2026

रिपोर्ट -नीरज उत्तराखंडी
जनपद उत्तरकाशी के मोरी विकासखंड के सीमांत और दुर्गम गांव ओसला में शिक्षा व्यवस्था की बदहाली एक गंभीर सवाल बनकर सामने आई है। हरी की दून ट्रैक मार्ग पर बसे इस अंतिम गांव में जूनियर हाईस्कूल भवन का निर्माण पिछले 15 वर्षों से अधूरा पड़ा हुआ है। अब इस मामले में शिक्षा विभाग की बड़ी लापरवाही भी उजागर हुई है, क्योंकि भवन निर्माण से संबंधित महत्वपूर्ण पत्रावली विभागीय अभिलेखों से गायब पाई गई है। खंड शिक्षा अधिकारी ने पूरे मामले की जांच के लिए मुख्य शिक्षा अधिकारी उत्तरकाशी को पत्र भेज दिया है।

वर्ष 2008 में स्वीकृत हुई थी निर्माण योजना

ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 2008 में जूनियर हाईस्कूल भवन निर्माण के लिए लगभग नौ लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई थी। योजना के तहत दो कक्षों और एक कार्यालय कक्ष का निर्माण होना था। शुरुआती दौर में कुछ कार्य किया गया, लेकिन निर्माण बीच में ही रुक गया। तब से लेकर आज तक भवन अधूरा खड़ा है और विद्यालय के उपयोग के योग्य नहीं बन सका।

150 परिवारों के बच्चों का भविष्य दांव पर

ओसला गांव में लगभग 150 परिवार निवास करते हैं। गांव के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध न होने के कारण अभिभावकों को उन्हें गांव से बाहर पढ़ाई के लिए भेजना पड़ता है। कई बच्चों को 10 से 50 किलोमीटर दूर तक जाकर शिक्षा प्राप्त करनी पड़ती है। दुर्गम पहाड़ी रास्तों, सीमित यातायात और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों के कारण अभिभावकों को भी बच्चों के साथ जाना पड़ता है, जिससे आर्थिक और सामाजिक कठिनाइयां बढ़ जाती हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि यदि विद्यालय भवन समय पर बन गया होता तो बच्चों को स्थानीय स्तर पर बेहतर शैक्षिक वातावरण मिलता और अधिक छात्र विद्यालय से जुड़ते।

मामले के सार्वजनिक होने के बाद शिक्षा विभाग में हलचल तेज हो गई। अधिकारियों ने भवन निर्माण से संबंधित रिकॉर्ड खंगालने शुरू किए, लेकिन संबंधित फाइल कार्यालय में उपलब्ध नहीं मिली। इससे यह आशंका और गहरी हो गई है कि वर्षों से निर्माण कार्य क्यों ठप पड़ा रहा और स्वीकृत धनराशि का उपयोग किस प्रकार किया गया।

जांच के लिए मुख्य शिक्षा अधिकारी को भेजा पत्र

खंड शिक्षा अधिकारी पंकज कुमार शर्मा ने बताया कि विद्यालय भवन निर्माण से जुड़ी पत्रावली दफ्तर से गायब है और उसकी तलाश की जा रही है। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और तथ्य सामने लाने के लिए मुख्य शिक्षा अधिकारी उत्तरकाशी को पत्र भेजा गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमों के अनुरूप कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षा के अभाव से बढ़ रहा पलायन

ग्रामीणों का कहना है कि सीमांत गांवों में शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव पलायन को बढ़ावा दे रहा है। जब बच्चों की पढ़ाई के लिए भी परिवारों को गांव छोड़ना पड़े, तो लोगों का अपने मूल गांवों में टिके रहना कठिन हो जाता है। विशेषज्ञों का भी मानना है कि दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को मजबूत किए बिना पलायन पर प्रभावी नियंत्रण संभव नहीं है।

ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

स्थानीय लोगों ने प्रशासन और शिक्षा विभाग से मांग की है कि—

वर्षों से अधूरे पड़े जूनियर हाईस्कूल भवन का निर्माण तत्काल पूरा कराया जाए।

निर्माण कार्य में हुई देरी और फाइल गायब होने की निष्पक्ष जांच कराई जाए।

जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

सीमांत क्षेत्रों में शिक्षा सुविधाओं को प्राथमिकता के आधार पर सुदृढ़ किया जाए।

बच्चों के भविष्य से जुड़ा गंभीर प्रश्न

ओसला जैसे सीमांत गांवों में शिक्षा केवल सुविधा नहीं, बल्कि गांवों के अस्तित्व और भविष्य से जुड़ा प्रश्न है। 15 वर्षों से अधूरा पड़ा विद्यालय भवन और अब उससे संबंधित फाइल का गायब होना प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि इस बार जांच केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि बच्चों को उनका अधिकार दिलाने की दिशा में ठोस कार्रवाई होगी।

Parvatjan Team
Parvatjan Team
Parvatjan Team is dedicated to delivering the latest, accurate, and reliable news from Uttarakhand. We cover local issues, administrative updates, public interest stories, and breaking news in a clear and simple manner.

📢 खबरों को सबसे पहले पाने के लिए पर्वतजन को फॉलो करें

👉 WhatsApp Channel Join करें 👉 WhatsApp Group Join करें 📲 App Download करें

Related Posts