15 मई 2026
मोरी/ पुरोला/नौगांव/ उत्तरकाशी। नीरज उत्तराखंडी
रवांई घाटी में इस वर्ष मौसम की बेरुखी ने सेब उत्पादकों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। पहले सर्दियों में पर्याप्त बर्फबारी न होने से सेब के बगीचों को आवश्यक चिलिंग आवर्स नहीं मिल सके, जिससे फूल और फल बनने की प्रक्रिया प्रभावित हुई।
इसके बाद अप्रैल और मई में हुई ओलावृष्टि तथा लगातार बारिश ने बची-खुची उम्मीदों को भी गहरा झटका दिया है। सेब के दानों पर पड़े ओलों के गहरे निशानों के कारण इस वर्ष किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिलना मुश्किल दिखाई दे रहा है।
रवांई क्षेत्र के नौगांव, पुरोला और मोरी ब्लॉक उत्तरकाशी जनपद के प्रमुख सेब उत्पादक क्षेत्र हैं। अकेले मोरी ब्लॉक में प्रतिवर्ष लगभग 25 हजार मीट्रिक टन सेब का उत्पादन होता है।
इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा सेब बागवानी पर आधारित है और हजारों परिवार प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से इसी पर निर्भर हैं। लेकिन इस बार मौसम की मार ने बागवानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है।
परागण के समय बिगड़ा मौसम
अप्रैल माह सेब के फूलों में परागण का सबसे महत्वपूर्ण समय होता है। इसी अवधि में मधुमक्खियां परागण कर बेहतर फल उत्पादन में अहम भूमिका निभाती हैं।
लेकिन इस वर्ष इसी दौरान लगातार बारिश और ओलावृष्टि होने से बड़ी संख्या में फूल झड़ गए और परागण प्रक्रिया भी बाधित हो गई। परिणामस्वरूप पेड़ों पर फल की संख्या कम रही और जो फल लगे भी, वे ओलों से क्षतिग्रस्त हो गए।
बागवानों के लिए लागत निकालना भी मुश्किल
सेब बागानों में वर्षभर खाद, दवा, छंटाई, सिंचाई और रखरखाव पर भारी खर्च किया जाता है। छोटे और सीमांत काश्तकारों का कहना है कि इस बार उत्पादन और गुणवत्ता दोनों प्रभावित होने से लागत निकालना भी कठिन हो जाएगा।
कई किसानों ने तो फसल से लगभग उम्मीद छोड़ दी है। उनका कहना है कि यदि इस वर्ष घर के उपयोग लायक सेब भी मिल जाएं तो यही बड़ी बात होगी।
गुणवत्ता पर पड़ेगा सीधा असर
फल विशेषज्ञों के अनुसार ओलावृष्टि से सेब की बाहरी सतह पर पड़े गहरे निशान उसकी गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। ऐसे फलों को बाजार में प्रथम श्रेणी का दर्जा नहीं मिल पाता और इनके दाम काफी कम हो जाते हैं। इससे किसानों की आय पर सीधा असर पड़ता है।
भविष्य के लिए चिंताजनक संकेत
देवराना घाटी फल एवं सब्जी उत्पादक एसोसिएशन के अध्यक्ष जयेंद्र सिंह राणा, सेब उत्पादक विरेन्द्र चौहान, ने कहा कि मौसम की अनिश्चितता और प्राकृतिक आपदाओं के कारण सेब उत्पादन में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है।
उन्होंने इसे भविष्य के लिए गंभीर संकेत बताते हुए सरकार से बागवानों के लिए विशेष राहत पैकेज, फसल बीमा और वैज्ञानिक सहायता उपलब्ध कराने की मांग की।
उन्होंने कहा कि यदि समय रहते जलवायु परिवर्तन के प्रभावों से निपटने के लिए ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले वर्षों में सेब उत्पादन और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों पर गहरा संकट खड़ा हो सकता है।




