ब्रेकिंग: लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर हाईकोर्ट गंभीर। मुख्य सचिव से सर्च कमेटी गठन के संबंध में मांगी रिपोर्ट

नैनीताल, 15 मई:  उत्तराखंड में लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर उच्च न्यायालय बेहद गंभीर है और मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ ने प्रदेश के मुख्य सचिव को जून पहले सप्ताह में चयन समिति की बैठक कर 16 जून तक प्रगति रिपोर्ट पेश करने को कहा है। सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने बेहद तल्ख टिप्पणियां […]

नैनीताल, 15 मई:  उत्तराखंड में लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर उच्च न्यायालय बेहद गंभीर है और मुख्य न्यायाधीश की अगुवाई वाली पीठ ने प्रदेश के मुख्य सचिव को जून पहले सप्ताह में चयन समिति की बैठक कर 16 जून तक प्रगति रिपोर्ट पेश करने को कहा है। सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने बेहद तल्ख टिप्पणियां भी कीं।

मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ में शुक्रवार को हल्द्वानी निवासी रविशंकर जोशी की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई।

मुख्य सचिव आनंद बर्धन की ओर से आज शपथपत्र के रूप जवाब पेश किया गया जिसमें कहा गया कि सर्च कमेटी गठन की प्रक्रिया जारी है, लेकिन प्रक्रिया की जटिलता और व्यापकता को देखते हुए लोकायुक्त एवं सदस्यों की नियुक्ति में अभी और समय लग सकता है। इसके लिए सरकार ने अदालत से अतिरिक्त समय देने का अनुरोध किया है।

शपथपत्र में आगे बताया गया है कि 3 अप्रैल 2026 को चयन समिति की बैठक प्रस्तावित थी, लेकिन अपरिहार्य कारणों से वह आयोजित नहीं हो सकी।

इसके बाद 29 अप्रैल 2026 को मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में चयन समिति की बैठक हुई, जिसमें विधानसभा अध्यक्ष , न्यायमूर्ति तथा सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति शामिल हुए। हालांकि नेता प्रतिपक्ष अपरिहार्य कारणों से बैठक में उपस्थित नहीं हो सके।

बैठक में लोकायुक्त चयन के लिए सर्च कमेटी गठित करने पर चर्चा हुई। समिति ने निर्णय लिया कि सेवानिवृत्त न्यायाधीशों, आईएएस और आईपीएस अधिकारियों के नामों का पैनल तैयार किया जाएगा। साथ ही वित्त, बीमा, बैंकिंग, विधि और प्रबंधन क्षेत्र के विशेषज्ञों के नाम भी अगली बैठक में प्रस्तुत किए जाएंगे।

प्रगति रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि वर्तमान में लोकायुक्त कार्यालय में 9 कर्मचारी कार्यरत हैं। अदालत के पूर्व आदेशों के कारण सरकार को वेतन और अन्य खर्च जारी करने में कठिनाई हो रही है। जनवरी 2026 से कर्मचारियों के वेतन तथा बिजली, पानी और टेलीफोन बिलों का भुगतान लंबित है।

राज्य सरकार ने अदालत से अनुरोध किया है कि कर्मचारियों के वेतन और कार्यालय संचालन से जुड़े खर्चों के नियमित भुगतान की अनुमति दी जाए।

महाधिवक्ता की ओर से यह भी कहा गया कि चयन समिति की बैठक जून पहले सप्ताह में हो सकेगी और इसमें लोकायुक्त के लिए सर्च कमेटी के नाम पर चर्चा होगी।

अंत में खंडपीठ ने सरकार को 16 जून तक की मोहलत देते हुए मुख्य सचिव को बैठक की प्रगति रिपोर्ट खंडपीठ के समक्ष पेश करने के निर्देश दे दिए। इस मामले में 16 जून को पुनः सुनवाई होगी।

यहां बता दें कि दायर जनहित याचिका में कहा गया है कि राज्य में लंबे समय से लोकायुक्त का पद रिक्त पड़ा हुआ है। राज्य सरकार लोकायुक्त कार्यालय पर प्रतिवर्ष 2 से 3 करोड़ रुपये का ख़र्च कर रही है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि लोकायुक्त के अभाव में राज्य में भ्रष्टाचार के आरोपों की स्वतंत्र और प्रभावी जांच के लिए कोई स्वायत्त तंत्र मौजूद नहीं है।

साथ ही आरोप लगाया गया है कि राज्य की सभी जांच एजेंसियां सरकार के नियंत्रण में कार्य करती हैं, जिससे जांच की स्वतंत्रता और निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं।

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