बड़ी खबर: चाय बागान सीलिंग भूमि को लेकर बड़ा विवाद, अवैध रजिस्ट्रियों और स्टाम्प चोरी के आरोप

विकासनगर। रिपोर्ट-नीरज उत्तराखंडी 

विकासनगर क्षेत्र में चाय बागान सीलिंग की प्रतिबंधित भूमि को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है। आयोजित एक प्रेस वार्ता में सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय नागरिकों ने सब रजिस्ट्रार कार्यालयों तथा तहसील प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि प्रतिबंधित भूमि की मिलीभगत से अवैध रजिस्ट्रियां कराई गईं, फर्जी हस्तांतरण आख्या लगाई गई और सरकार को लाखों रुपये के स्टाम्प शुल्क का नुकसान पहुंचाया गया।

प्रेस वार्ता में वक्ताओं ने कहा कि ग्राम छरबा स्थित भूमि की एक रजिस्ट्री में सर्किल रेट से कम मूल्य दर्शाकर स्टाम्प शुल्क की चोरी की गई। आरोप के अनुसार दिनांक 17 अगस्त 2023 को विक्रय विलेख संख्या 8916 के तहत दर्ज रजिस्ट्री में भूमि का मूल्य वास्तविक दर से काफी कम दर्शाया गया।

उनका दावा है कि संबंधित भूमि का सर्किल रेट लगभग 4 करोड़ 20 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर होना चाहिए था, जबकि रजिस्ट्री केवल 1 करोड़ 99 लाख 50 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से कर दी गई। शिकायत के बाद मामले में शुल्क की कमी सामने आई, जिससे लाखों रुपये की स्टाम्प चोरी का मामला उजागर होने का दावा किया गया।

वक्ताओं ने सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत प्राप्त दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा कि चाय बागान सीलिंग की भूमि पर प्रशासनिक रोक होने के बावजूद बड़ी संख्या में रजिस्ट्रियां की गईं। आरोप लगाया गया कि सब रजिस्ट्रार प्रथम कार्यालय विकासनगर में वर्ष 2023 से 2025 के बीच 62 रजिस्ट्रियां दर्ज की गईं, जबकि सब रजिस्ट्रार द्वितीय कार्यालय में इसी अवधि में 226 रजिस्ट्रियां की गईं। इस प्रकार कुल 288 रजिस्ट्रियों को लेकर प्रशासनिक कार्यप्रणाली और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठाए गए।

प्रेस वार्ता में तहसील प्रशासन के चार लेखपालों पर भी गंभीर आरोप लगाए गए। वक्ताओं ने कहा कि ग्राम रसूलपुर, बाबूगढ़ और अंबाड़ी से संबंधित कई मामलों में फर्जी एवं कूटरचित हस्तांतरण आख्या लगाकर प्रतिबंधित भूमि को वैध दर्शाने का प्रयास किया गया। बताया गया कि ऐसे 23 दाखिल-खारिज मामलों को तहसीलदार विकासनगर द्वारा निरस्त भी किया जा चुका है।

सामाजिक कार्यकर्ताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने, संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को तत्काल निलंबित करने तथा पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि एक माह के भीतर प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो मामले को उच्च न्यायालय नैनीताल में चुनौती दी जाएगी।

प्रेस वार्ता में सुमित कुमार (पूर्व एनसीसी कैडेट), भीम सिंह, डॉ. दीपक, विपिन पंवार सहित कई स्थानीय लोग मौजूद रहे।

Parvatjan Team
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