देहरादून: उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद प्रकरण में बड़ी और कड़ी कार्रवाई की है। सरकार ने मामले में तत्कालीन नगर आयुक्त हरिद्वार वरुण चौधरी के खिलाफ सेवा से बर्खास्त करने की संस्तुति करते हुए पूर्व जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह पर भी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई का फैसला लिया है।
मुख्यमंत्री कार्यालय से जारी जानकारी के अनुसार, तत्कालीन नगर आयुक्त वरुण चौधरी को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त किए जाने की संस्तुति की गई है। वहीं तत्कालीन जिलाधिकारी हरिद्वार कर्मेंद्र सिंह को अपने पदीय दायित्वों और कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही का दोषी मानते हुए उनके विरुद्ध दीर्घ शास्ति (मेजर पनिशमेंट) अधिरोपित करने का निर्णय लिया गया है।
भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर चलते हुए मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद प्रकरण में बड़ी और कड़ी कार्रवाई की है । प्रकरण में तत्कालीन नगर आयुक्त हरिद्वार नगर निगम वरुण चौधरी को तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त करने की संस्तुति की गई…
— CM Office Uttarakhand (@ukcmo) June 19, 2026
डीओपीटी को भेजी जाएगी कार्रवाई की संस्तुति
सरकार ने दोनों अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के लिए कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) को संस्तुति भेजने का निर्णय लिया है। इसके अलावा उस समय तैनात रहे एसडीएम अजयवीर सिंह के खिलाफ परनिंदा प्रविष्टि दर्ज करने और उनकी तीन वेतनवृद्धियां रोकने के निर्देश भी जारी किए गए हैं।
जांच में सामने आई थीं गंभीर अनियमितताएं
गौरतलब है कि हरिद्वार नगर निगम भूमि खरीद प्रकरण सामने आने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले का तत्काल संज्ञान लिया था। प्रारंभिक जांच में अनियमितताओं के संकेत मिलने पर तत्कालीन जिलाधिकारी कर्मेंद्र सिंह, पूर्व नगर आयुक्त वरुण चौधरी समेत कई अधिकारियों को निलंबित किया गया था।
इसके बाद विशेष जांच और ऑडिट के जरिए पूरे मामले की गहन पड़ताल कराई गई, जिसमें कई स्तरों पर गंभीर अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही के तथ्य सामने आए।
भ्रष्टाचार पर कोई समझौता नहीं: मुख्यमंत्री धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने स्पष्ट कहा है कि भ्रष्टाचार के मामलों में किसी भी स्तर पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने दोहराया कि शासन-प्रशासन में पारदर्शिता, जवाबदेही और जनहित सर्वोपरि है तथा दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई जारी रहेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जनधन के दुरुपयोग और पद के दुरुपयोग को किसी भी परिस्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और सरकार भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी मुहिम को और अधिक सख्ती से आगे बढ़ाएगी।
उत्तराखंड में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई
राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में धामी सरकार की इस कार्रवाई को राज्य में भ्रष्टाचार के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी प्रशासनिक कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है। इस फैसले ने साफ संदेश दिया है कि सरकारी पद का दुरुपयोग करने वाले अधिकारियों पर सरकार की नजर है और दोष सिद्ध होने पर कठोर कार्रवाई तय है।
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