- मालदेवता में सास-बहू की जोड़ी ने राखी कारोबार से मचाई धूम
- हैंडमेड राखियों की बढ़ी मांग, एनआरएलएम से जुड़ी ग्रामीण महिलाएं स्वरोजगार की राह पर | दून के मॉल और सचिवालय में लगेंगे स्टॉल
देहरादून, 21 अगस्त।, नीरज उत्तराखंडी
रक्षाबंधन का पर्व नजदीक आते ही देहरादून जिले में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं द्वारा तैयार की जा रही हस्तनिर्मित राखियों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के सहयोग से रायपुर, सहसपुर और डोईवाला विकासखंड की महिलाएं राखी निर्माण को स्वरोजगार का जरिया बनाकर अपनी आय बढ़ाने के साथ आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं।
इसी कड़ी में रायपुर विकासखंड के मालदेवता क्षेत्र की सास-बहू लीला रावत और अलका रावत की जोड़ी राखी कारोबार में अपनी अलग पहचान बना रही है। नई दिशा महिला क्लस्टर लेवल फेडरेशन के अंतर्गत आशा किरण स्वयं सहायता समूह से जुड़ी दोनों महिलाएं मिलकर आकर्षक डिजाइन की राखियां तैयार कर रही हैं। इस वर्ष उन्होंने दो हजार से अधिक राखियां तैयार करने का लक्ष्य रखा है, जिसमें करीब 1,500 राखियां तैयार हो चुकी हैं।
पिछले साल 1200 राखियों से कमाया 25 हजार का मुनाफा
लीला और अलका ने बताया कि पिछले वर्ष प्रशासन के सहयोग से उन्हें बेहतर बाजार उपलब्ध हुआ था। दोनों ने करीब 1,200 राखियां तैयार कर सीधे बाजार में बिक्री की, जिससे लगभग 25 हजार रुपये का मुनाफा हुआ। कारोबार में मिली सफलता और ग्राहकों की मांग को देखते हुए इस वर्ष उत्पादन बढ़ाने का निर्णय लिया गया है।
प्राइवेट नौकरी छोड़ सास के साथ शुरू किया कारोबार
अलका रावत ने पिछले वर्ष प्राइवेट नौकरी छोड़कर अपनी सास लीला रावत के साथ स्वरोजगार की राह चुनी। दोनों ने मालदेवता क्षेत्र में ‘विनी वंडर्स क्रिएशन’ नाम से दुकान शुरू की है। यहां राखियों के अलावा अन्य हस्तनिर्मित और स्थानीय उत्पाद भी तैयार कर बेचे जा रहे हैं।
अलका के मुताबिक स्वयं सहायता समूह से जुड़ने के बाद उन्हें आय का बेहतर अवसर मिला है। सरकारी योजनाओं और समूह के माध्यम से मिलने वाले सहयोग ने कारोबार को आगे बढ़ाने में मदद की है।
सोशल मीडिया से भी मिल रहे ऑर्डर
हैंडमेड राखियों की मांग अब स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं है। ‘विनी वंडर्स क्रिएशन’ के इंस्टाग्राम प्लेटफॉर्म के माध्यम से भी ग्राहकों से ऑर्डर मिल रहे हैं। महिलाएं ऑनलाइन प्राप्त ऑर्डर तैयार कर ग्राहकों तक पहुंचा रही हैं। इससे उनके कारोबार को स्थानीय बाजार के साथ डिजिटल बाजार का भी लाभ मिल रहा है।
पारंपरिक से आधुनिक डिजाइन तक राखियां
समूह की महिलाओं द्वारा ऊन, क्रोशिया, मौली के धागे, रिबन समेत विभिन्न सामग्रियों से आकर्षक राखियां तैयार की जा रही हैं। इनमें भैया दूज, महाकाल, रुद्राक्ष और नजरबट्टू समेत कई पारंपरिक एवं आधुनिक डिजाइन शामिल हैं। राखियों की डिजाइनिंग, प्रिंटिंग, पैकेजिंग और प्रचार-प्रसार का काम भी महिलाएं स्वयं कर रही हैं।
वर्ष 2016 से एनआरएलएम से जुड़ी हैं लीला
आशा किरण स्वयं सहायता समूह की अध्यक्ष लीला रावत वर्ष 2016 से राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़ी हैं। उन्होंने बताया कि इस दौरान उन्हें विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिला, जिससे स्वरोजगार को आगे बढ़ाने में मदद मिली। उनका कहना है कि समूह की महिलाएं सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ कारोबार का विस्तार कर रही हैं।
सहसपुर और डोईवाला में भी बड़े स्तर पर उत्पादन
रायपुर के साथ सहसपुर और डोईवाला विकासखंड की स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं भी बड़े स्तर पर राखियां तैयार कर रही हैं। डोईवाला विकासखंड की गायत्री क्लस्टर लेवल फेडरेशन के अंतर्गत वैभव लक्ष्मी और पहाड़ी भुली ग्राम संगठनों से जुड़ी करीब 100 महिलाएं विभिन्न डिजाइन की राखियां बना रही हैं। इनकी बिक्री रायवाला और श्यामपुर के बाजारों में स्टॉल लगाकर की जा रही है।
वहीं, सहसपुर विकासखंड के सक्षम क्लस्टर की महिलाएं भी राखियां तैयार कर रही हैं। उनकी राखियों को ब्लॉक स्तर पर प्रदर्शित करने के साथ सेलाकुई, सहसपुर और विकासनगर क्षेत्र में बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है।
दून के प्रमुख मॉलों में लगेंगे स्टॉल
मुख्य विकास अधिकारी अभिनव शाह ने बताया कि रक्षाबंधन के अवसर पर स्वयं सहायता समूहों की महिलाएं आकर्षक राखियां तैयार कर रही हैं। मुख्यमंत्री सशक्त बहना योजना के तहत महिलाओं को स्वरोजगार के बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि महिलाओं को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से देहरादून के तीन-चार प्रमुख मॉलों में राखियों के स्टॉल लगाए जाएंगे। उन्होंने आमजन से स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं द्वारा तैयार हस्तनिर्मित राखियों और अन्य स्थानीय उत्पादों की खरीदारी कर उनके स्वरोजगार को प्रोत्साहित करने की अपील की।
24 से 27 अगस्त तक सचिवालय में पांच स्टॉल
सहायक परियोजना निदेशक अनीता पंवार ने बताया कि पिछले वर्ष की तरह इस वर्ष भी एनआरएलएम से जुड़ी ग्रामीण महिलाएं बेहतर गुणवत्ता वाली राखियां बाजार में उपलब्ध करा रही हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देशानुसार मुख्यमंत्री सशक्त बहना योजना के अंतर्गत 24 से 27 अगस्त तक उत्तराखंड सचिवालय में पांच स्टॉल लगाए जाएंगे।
इन स्टॉलों पर स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं राखियों के साथ विभिन्न पहाड़ी और स्थानीय उत्पादों की प्रदर्शनी एवं बिक्री करेंगी।
रक्षाबंधन के अवसर पर राखी निर्माण से जुड़ी ग्रामीण महिलाओं की यह पहल नारी सशक्तीकरण और स्थानीय स्वरोजगार की तस्वीर को मजबूत कर रही है। मालदेवता की लीला और अलका की सास-बहू की जोड़ी समेत जिलेभर की समूह महिलाएं अपने हुनर को कारोबार में बदलकर आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश कर रही हैं।


