सुशील खत्री,पिथौरागढ़।
मुनस्यारी के तत्कालीन थानाध्यक्ष रहे प्रदीप सिंह चौहान को विशेष सत्र न्यायालय (एससी/एसटी एक्ट) पिथौरागढ़ ने एक चर्चित मामले में दोषी करार दिया है। न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता की धारा 323 और 504 के साथ-साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की विभिन्न धाराओं में दोषसिद्धि दर्ज करते हुए सजा सुनाई है। यह मामला वर्ष 2019 में मुनस्यारी में हुई कथित मारपीट और जातिसूचक टिप्पणियों से जुड़ा था।
वर्ष 2019 में दर्ज हुआ था मामला
अभियोजन के अनुसार, मुनस्यारी क्षेत्र में एक कैफे संचालक ने आरोप लगाया था कि पंचायत चुनाव के दौरान हुई एक घटना के बाद तत्कालीन थानाध्यक्ष ने उसके साथ मारपीट की, अभद्र व्यवहार किया तथा जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया। बाद में इस संबंध में मुकदमा दर्ज कराया गया था और मामले की जांच के बाद आरोप पत्र न्यायालय में प्रस्तुत किया गयामामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कई गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया। न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयानों तथा अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद आरोपी को दोषी पाया।
विशेष न्यायाधीश ने दोषी को धारा 323 आईपीसी में एक वर्ष के कठोर कारावास, धारा 504 आईपीसी में एक वर्ष के कठोर कारावास, एससी-एसटी एक्ट की धारा 3(1) के तहत दो वर्ष के कठोर कारावास व जुर्माना तथा धारा 3(2) के तहत एक वर्ष के कठोर कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है।
मुकदमे में आरोप पत्र 4 मार्च 2020 को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया था, जबकि 21 अगस्त 2026 को फैसला सुनाया गया।


