- ग्रामीणों का दावा—अधिकारी लागत और कराए गए कार्य का नहीं दे सके संतोषजनक जवाब, स्वतंत्र जांच की मांग
मोरी, उत्तरकाशी। 26 सितंबर 2026। नीरज उत्तराखंडी
ग्राम पंचायत कुकरेड़ा के खूनीगाड़ में सिंचाई योजना को लेकर सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायत अब जांच प्रक्रिया को लेकर भी सवालों के घेरे में आ गई है। ग्रामीणों ने जांच में लीपापोती का आरोप लगाते हुए योजना की लागत, निर्माण कार्य और सुरक्षा दीवारों से संबंधित अभिलेखों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों के अनुसार 25 सितंबर 2026 को सीएम हेल्पलाइन में दर्ज शिकायत की जांच के लिए अधीक्षण अभियंता, वृत्त पौड़ी, सहायक अभियंता उपखंड नौगांव और जेई नौगांव मौके पर पहुंचे। शिकायत के तहत मेन हेड तथा करीब 900 मीटर गूल की रिपेयरिंग और दो चैंबरों से संबंधित कार्यों की जांच की जानी थी।
ग्रामीणों का आरोप है कि जांच के दौरान मौके पर मौजूद ग्रामीणों के साथ अधिकारियों का अपेक्षित सहयोग नहीं रहा और योजना की वास्तविक लागत तथा कराए गए कार्यों के संबंध में विभागीय अधिकारियों की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। ग्रामीणों ने सवाल उठाया कि योजना में कितनी धनराशि खर्च हुई, कितनी सुरक्षा दीवारें बनाई गईं और मौके पर स्वीकृत कार्य के अनुरूप कितना निर्माण हुआ, इसका स्पष्ट जवाब जांच के दौरान नहीं मिल सका।
एक ही कार्य में अलग-अलग वर्षों में धनराशि खर्च करने का सवाल
ग्रामीणों ने उपलब्ध जानकारी के आधार पर बताया कि योजना के लिए वर्ष 2023-24 में 9.71 लाख रुपये की स्वीकृति तथा वर्ष 2024-25 में 4.20 लाख रुपये की धनराशि उसी कार्य के लिए एसीपी के तहत खर्च किए जाने की बात सामने आ रही है। ग्रामीणों ने मांग की है कि दोनों स्वीकृतियों और भुगतानों के अभिलेखों का मिलान कर यह स्पष्ट किया जाए कि धनराशि किस कार्य के लिए और किस आधार पर खर्च की गई।
ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने वृत्त पौड़ी से बार-बार जांच के संबंध में जानकारी मांगी, लेकिन उन्हें स्पष्ट जवाब नहीं मिला। सीएम पोर्टल के रिकॉर्ड में शिकायत मुख्य अभियंता एवं विभागाध्यक्ष, लघु सिंचाई विभाग, उत्तराखंड, लेन नंबर-3, इंद्रप्रस्थ कॉलोनी, नत्थनपुर, देहरादून के स्तर पर भी प्रदर्शित हो रही है।
ग्रामीणों ने उठाए पारदर्शिता पर सवाल
ग्रामीणों का आरोप है कि वे योजना में कथित अनियमितताओं की जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग कर रहे हैं, लेकिन जांच प्रक्रिया में ही पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि शिकायत के समाधान के बजाय विभागीय स्तर पर मामले को निस्तारित करने का प्रयास किया जा रहा है।
हालांकि, भ्रष्टाचार अथवा धनराशि के दुरुपयोग के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में मामले में स्वीकृति पत्र, तकनीकी स्वीकृति, माप पुस्तिका (एमबी), कार्यादेश, भुगतान विवरण, पूर्णता प्रमाणपत्र और मौके पर हुए निर्माण का स्वतंत्र तकनीकी सत्यापन महत्वपूर्ण होगा।
जांच के दौरान ये ग्रामीण रहे मौजूद
जांच के दौरान जनक सिंह, नरेंद्र सिंह, सुरेंद्र सिंह, कमल सिंह, टिकम सिंह,गुमान सिंह,प्रदीप कुमार, साधुराम, उत्तराखंड आंदोलनकारी ज्ञान चंद, खेमचंद, रूपचंद, संतराम, रणवीर सिंह, जगदीश कुमार, मोहनदास और सहित अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।
अब सवाल निष्पक्ष जांच का
मामले में ग्रामीणों की मांग है कि पूर्व में योजना का निरीक्षण कर चुके अधिकारियों से अलग स्वतंत्र तकनीकी टीम गठित कर जांच कराई जाए। स्वीकृत धनराशि और मौके पर हुए कार्य का माप कराकर यह स्पष्ट किया जाए कि योजना में वास्तव में कितना कार्य हुआ और किस मद में कितनी धनराशि खर्च की गई। इससे सीएम हेल्पलाइन पर की गई शिकायत के वास्तविक निस्तारण की स्थिति भी स्पष्ट हो सकेगी।


