हस्तनिर्मित उत्पादों के स्टॉल बने आकर्षण का केंद्र
तीन दिवसीय कार्यशाला के दौरान विद्यार्थियों ने विभिन्न प्रकार के हस्तनिर्मित उत्पाद तैयार किए। समापन अवसर पर आयोजित प्रदर्शनी में इन उत्पादों को प्रदर्शित करने के साथ उनकी बिक्री के लिए भी स्टॉल लगाए गए।
विद्यार्थियों ने अपनी कलाकृतियों को लोगों के सामने प्रस्तुत किया और उनके विपणन का अनुभव भी प्राप्त किया। इस पहल से छात्रों को अपनी रचनात्मकता को व्यावहारिक रूप देने और उत्पादों की बिक्री से जुड़ी बारीकियां समझने का अवसर मिला।
आत्मनिर्भर भारत और वोकल फॉर लोकल को बढ़ावा
विश्वविद्यालय की इस पहल का उद्देश्य भारत सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को प्रोत्साहित करना तथा विद्यार्थियों में उद्यमिता की भावना विकसित करना था।
प्रदर्शनी के माध्यम से विद्यार्थियों को यह समझने का अवसर मिला कि किस तरह अपनी कला और कौशल को एक उपयोगी उत्पाद में बदलकर स्वरोजगार की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है।
विश्वविद्यालय के अधिकारियों ने की विद्यार्थियों की सराहना
कार्यक्रम के दौरान विश्वविद्यालय के प्रो-वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार और विभिन्न विभागों के प्राध्यापकों ने प्रदर्शनी में लगाए गए स्टॉलों का अवलोकन किया। अतिथियों ने विद्यार्थियों के हस्तनिर्मित उत्पादों की सराहना की और स्वयं खरीदारी कर उनका उत्साहवर्धन भी किया।
उपस्थित अधिकारियों ने कहा कि इस तरह के आयोजन विद्यार्थियों में केवल रचनात्मकता ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक ज्ञान, उत्पाद विपणन और वित्तीय समझ भी विकसित करते हैं।
प्रदर्शनी में विश्वविद्यालय के शिक्षकों, कर्मचारियों और छात्र-छात्राओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। ‘क्रॉफ्टोपिया’ के माध्यम से विद्यार्थियों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ने का मंच मिला।






