हरिद्वार में दूसरे राज्यों से आने वाली बसों के खिलाफ परिवहन विभाग की कार्रवाई के बाद पंजाब की राजनीति में विवाद तेज हो गया है। पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत आने वाली बसों पर कार्रवाई को लेकर वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने भाजपा पर योजना को बंद कराने की साजिश रचने का आरोप लगाया है।
वहीं, उत्तराखंड प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि कार्रवाई किसी राज्य विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि परिवहन नियमों के उल्लंघन पर की जा रही है। प्रशासन के अनुसार, हरिद्वार में पिछले पांच दिनों के दौरान 115 बसों के चालान किए गए और 15 बसों को सीज किया गया है।
हरिद्वार में बसों पर कार्रवाई से पंजाब में सियासी विवाद
हरिद्वार में पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना से जुड़ी बसों पर कार्रवाई का मुद्दा अब राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए भाजपा पर जनकल्याणकारी योजना को प्रभावित करने का आरोप लगाया है।
चीमा के मुताबिक, हरिद्वार में पंजाब की तीन बसों को इम्पाउंड किया गया, जबकि पांच बसों के चालान काटे गए। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इस कार्रवाई के जरिए पंजाब सरकार की तीर्थ यात्रा योजना को बंद कराने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के माध्यम से लोगों को धार्मिक स्थलों के दर्शन कराने की सुविधा दी जा रही है। उनके अनुसार, ऐसी योजना को राजनीतिक विवाद में नहीं घसीटना चाहिए। चीमा ने यह भी कहा कि भाजपा की कोशिशों से पंजाब में उसकी राजनीतिक स्थिति मजबूत नहीं होगी।
उत्तराखंड प्रशासन का जवाब, नियम तोड़ने वाली बसों पर कार्रवाई
पंजाब सरकार की ओर से लगाए गए आरोपों के बीच उत्तराखंड परिवहन विभाग ने कार्रवाई को नियमित वाहन जांच अभियान का हिस्सा बताया है। अधिकारियों के मुताबिक, हाल के दिनों में बस दुर्घटनाओं की घटनाओं के बाद शासन ने प्रदेश के सभी जिलों में वाहनों की सघन जांच करने के निर्देश दिए थे।
हरिद्वार सीमावर्ती जिला होने के कारण यहां दूसरे राज्यों से आने वाली बसों की जांच तेज की गई है। विभाग का कहना है कि इस अभियान का उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और परिवहन नियमों का पालन कराना है।
परिवहन विभाग की जांच के दौरान बिना वैध परमिट चलने वाली, निर्धारित क्षमता से अधिक सवारियां बैठाने वाली और सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाली बसों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। स्लीपर और लग्जरी बसों की भी जांच की जा रही है, ताकि यात्रियों की सुरक्षा से जुड़े नियमों का पालन सुनिश्चित हो सके।
अधिकारियों के अनुसार, पिछले पांच दिनों में 115 बसों के चालान किए गए और 15 बसों को सीज किया गया। कार्रवाई के दायरे में उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली और मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों की बसें आई हैं।
तीर्थ यात्रा योजना की बस का परमिट समाप्त होने का दावा
परिवहन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पंजाब सरकार की मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना के तहत संचालित बताई गई एक बस भी जांच के दौरान मिली थी। अधिकारियों का दावा है कि यह बस बिहार राज्य की थी और उसका परमिट समाप्त हो चुका था। वैध परमिट के बिना संचालन किए जाने के कारण बस के खिलाफ कार्रवाई की गई।
एआरटीओ प्रशासन निखिल शर्मा और एआरटीओ प्रवर्तन नेहा झा के अनुसार, अभियान में करीब छह राज्यों की बसों पर कार्रवाई की गई है। विभाग का कहना है कि जांच के दौरान सभी वाहनों पर नियमों के आधार पर कार्रवाई की जा रही है और किसी खास राज्य को निशाना नहीं बनाया जा रहा है।
तीर्थ यात्रा योजना बनाम सड़क सुरक्षा, आमने-सामने दावे
हरिद्वार में बसों के खिलाफ कार्रवाई के बाद दो अलग-अलग पक्ष सामने आए हैं। पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा इसे मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना से जोड़ते हुए भाजपा पर राजनीतिक आरोप लगा रहे हैं। दूसरी ओर, उत्तराखंड परिवहन विभाग का कहना है कि कार्रवाई परमिट, यात्री क्षमता और सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के आधार पर की गई है।
ऐसे में विवाद का मुख्य सवाल यह है कि संबंधित बसों पर कार्रवाई किन नियमों के तहत हुई और क्या सभी मामलों में समान मानकों का पालन किया गया। प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, अभियान कई राज्यों की बसों के खिलाफ चलाया गया है। मामले में दोनों पक्षों के दावों और कार्रवाई से जुड़े आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर ही स्थिति का पूरा आकलन किया जा सकता है।






