- BRIDCUL के पुलों पर देरी और बदलाव से उठे सवाल
- कहीं ठेका समाप्त, कहीं स्पान बदला तो कहीं गुणवत्ता जांच में कार्रवाई; दस्तावेजों में दर्ज है करोड़ों के कार्यों का लंबा इंतजार
उत्तरकाशी। 4नवंबर
रिपोर्ट—नीरज उत्तराखंडी
उत्तरकाशी में BRIDCUL के माध्यम से निर्माणाधीन सड़क व पुल परियोजनाओं की दस्तावेजी पड़ताल में कई कार्यों में देरी, ठेका समाप्ति, पुनर्निविदा, डिजाइन में बदलाव और गुणवत्ता संबंधी विभागीय कार्रवाई के तथ्य सामने आए हैं। उपलब्ध अभिलेखों में फिलहाल किसी व्यापक वित्तीय अनियमितता की पुष्टि नहीं होती, लेकिन परियोजनाओं की प्रगति और निगरानी को लेकर सवाल जरूर खड़े होते हैं।
पिलंग के 48 मीटर पुल की 2021 में करीब 2.99 करोड़ रुपये की निविदा हुई और अनुबंध राशि करीब 3.21 करोड़ रुपये रही। कार्यावधि 150 दिन निर्धारित थी। इसके बावजूद पुल वर्षों तक अधूरा रहा।
मई 2026 में जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने निरीक्षण कर कार्य 15 अगस्त तक पूरा करने के निर्देश दिए थे। पुल के वास्तविक भुगतान, माप पुस्तिका और शेष कार्य की लागत का पूरा विवरण अभी महत्वपूर्ण दस्तावेजी कड़ी है।
जखोल-लिवाड़ी के 42 मीटर पुल की निविदा करीब 2.54 करोड़ रुपये की थी। परियोजना रिकॉर्ड में 256.66 लाख रुपये की स्वीकृत लागत के मुकाबले 108.61 लाख रुपये व्यय दर्ज है।
रिकॉर्ड में स्पष्ट उल्लेख है कि धीमी प्रगति के कारण ठेका समाप्त कर पुनर्निविदा की प्रक्रिया शुरू की गई। अब जांच का विषय यह है कि ठेका समाप्ति के समय कितनी राशि का भुगतान हुआ और शेष कार्य कितनी लागत पर कराया गया।
राणा-बनास-दुर्बिल पुल के मामले में भी परियोजना स्वरूप में बदलाव सामने आया है। मूल योजना में 36 मीटर स्पान का पुल प्रस्तावित था। बाद के रिकॉर्ड में इसे 42 मीटर करने और नई DPR तैयार करने की बात दर्ज है। इसके बाद 2024 में इसी स्थान पर 60 मीटर स्पान के डिजाइन एवं प्लानिंग के लिए कंसल्टेंसी आमंत्रित की गई। तकनीकी परिस्थितियों के कारण बदलाव संभव है, लेकिन मूल कार्य पर हुए खर्च और संशोधित DPR की स्वीकृति की जांच जरूरी है।
सौड़-ओसला के किमी 16 स्थित गंगाड गाड़ पुल के निर्माण में गुणवत्ता संबंधी शिकायत पर 2026 में BRIDCUL ने परियोजना प्रबंधक के खिलाफ कार्रवाई की थी। प्राथमिक जांच में निर्माण सामग्री को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज होने की बात सामने आई। बाद में हाईकोर्ट ने निलंबन आदेश को अधिकार-क्षेत्र के आधार पर निरस्त किया। मामले की विभागीय जांच PWD स्तर पर आगे बढ़ी। इसलिए इसे अभी दोषसिद्धि नहीं माना जा सकता।
वहीं थिरांग-सालंग के 90 मीटर पुल के कारण सड़क परियोजना की प्रगति भी प्रभावित होने का रिकॉर्ड में उल्लेख है। केंद्रीय PMGSY स्वीकृति में इस पुल के लिए 9.30 करोड़ रुपये से अधिक की लागत निर्धारित थी। 2024 के प्रगति रिकॉर्ड में सड़क का अधिकांश हिस्सा पूरा होने के बावजूद पुल के निर्माण के कारण सामग्री और मशीनरी की आवाजाही बाधित होने की बात दर्ज थी।
BRIDCUL के बड़कोट कार्यालय का CAG फील्ड ऑडिट 8 से 14 अक्टूबर 2024 तक हुआ था। हालांकि उपलब्ध ऑडिट कार्यक्रम से केवल ऑडिट होना प्रमाणित होता है; अंतिम ऑडिट आपत्ति या रिपोर्ट उपलब्ध हुए बिना किसी अनियमितता का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
दस्तावेजों से साफ है कि इन परियोजनाओं में स्वीकृत लागत, निविदा राशि, अनुबंध राशि और वास्तविक भुगतान अलग-अलग आंकड़े हैं। इसलिए वास्तविक स्थिति जानने के लिए DPR, Agreement, Measurement Book, भुगतान बिल, विस्तार आदेश, ठेका समाप्ति आदेश, पुनर्निविदा और Completion Certificate का मिलान जरूरी है।
पड़ताल का निष्कर्ष यही है कि फिलहाल मामला सीधे भ्रष्टाचार का प्रमाण नहीं, बल्कि परियोजनाओं की समयबद्धता, तकनीकी बदलाव, ठेका प्रबंधन और निगरानी की जवाबदेही का गंभीर सवाल है।






