नुक्ताचीनी//मक्खीमार पत्रकार

ye haiउत्तराखंड में हर गली में उग आए पत्रकारों के नित नए किस्सों से कई लोग परेशान हैं। पत्रकार महोदय ने दूसरे प्रदेश से आए एक कारोबारी को घेरा और चंद रुपए देकर उसके पार्टनर बन गए। कारोबारी ने पत्रकार पर विश्वास कर उसे धंधे में पार्टनर बनाया और हर महीने 30 हजार रुपए देने लगा। कारोबारी ने पत्रकार महोदय से अनुरोध किया कि यदि पार्टनरशिप जारी रखनी है तो तय रकम के मुताबिक शेष धनराशि भी उन्हें देनी होगी। इस पर पत्रकार कारोबारी को धमकाने लगा कि मैं दैनिक समाचारपत्र वाला पत्रकार हूं। चुपचाप से इसी तरह मुझे हर महीने पैसे देते रहो। पलीत पत्रकार से पिण्ड छुड़ाने के लिए कारोबारी ने पत्रकार को छह महीने में डेढ़ लाख के तीन लाख लौटाकर पिण्ड छुड़़ाया। कारोबारी को ठगने वाले पत्रकार पर समय की ऐसी मार पड़ी कि अखबार मालिक ने पत्रकार को नौकरी से पैदल कर दिया। आजकल पत्रकार महोदय अपने को गुजरे जमाने का धुरंदर पत्रकार बताकर मक्खी मार रहे हैं।

 

 

 

 

 

बहुखंडी को ‘जैक पर विश्वास!

1
1

जब किसी अधिकारी या कर्मचारी का स्थानांतरण हो जाए तो उसे नियमानुसार सरकारी आवास चार माह के अंदर खाली करना पड़ता है, परंतु ऋषिकेश लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता प्रवीण कुमार बहुखंडी पर यह नियम लागू नहीं होता। बहुखंडी जी का ट्रांसफर यहां से दिसंबर २०15 में हो गया था, परंतु सात माह गुजर जाने के बावजूद भी उन्होंने यहां का सरकारी आवास खाली नहीं किया, जबकि उनके परिवार का कोई सदस्य भी उक्त आवास पर नहीं रहता।
बताते हैं कि बहुखंडी जी को इस कार्यालय से इतना लगाव है कि पहले भी उनका स्थानांतरण यहां से कई बार हुआ, परंतु अपनी जैक-शैकसे वह फिर यहीं वापस आ जाते हैं। बावजूद इसके इस बार ऐसा लग रहा है कि उनकी यह सेटिंग काम नहीं कर पा रही। ऐसे में उनकी दाल किस तरह गलेगी, कहा नहीं जा सकता। हालांकि उन्हें अभी भी अपनी सेटिंग-गेटिंग पर पूर्ण विश्वास है कि हमेशा की तरह वह इस बार भी इस डिविजन में पुन: वापस लौट आएंगे।

 

 

2

मुस्लिम-संघी दोस्त-दोस्त

नेताओं के भी हाथी की तरह दिखाने के दांत कुछ और खाने के दांत कुछ ओर होते हैं। ठीक ऐसे ही राजनीति में जैसे नेता मंचों पर भले ही सांप्रदायिकता पर जहर भरे भाषण देते हों, पर बंद कमरे में ये सभी विरोधी नेता अक्सर एक ही टेबिल पर खाना खाते हैं। अब ये पार्टी के कार्यकर्ताओं को भी समझ में आने लग गया है। ऐसे ही हमारे संवाददाता एक पार्टी के वरिष्ठ मुस्लिम कार्यकर्ता से मिलने गए। तो वे साम्प्रदायिकता पर संघ के खिलाफ लंबी-लंबी बातें करने लग गए। चर्चा करते हुए हमारे संवाददाता ने किसी समस्या पर समाधान की बात क्या कह दी कि तपाक से बोल पड़े कि हमारे एक मित्र हैं जो आपकी इस समस्या का समाधान कर देंगे। जैसे ही संवाददाता ने उनसे उनका नाम-पता पूछा तो प्रत्युत्तर में बोल पड़े कि संघी हैं और मेरे खास दोस्तों में से है। मुस्कराते हुए संवाददाता से रहा नहीं गया और बोल पड़ा कि अभी तो आप इनको भला बुरा कह रहे थे और अब मित्र भी बता रहे हो। तो पेट की तरफ हाथ फेरते हुए सकुचाते हुए नेताजी बोले कि बोलेंगे नहीं, तो राजनीति कैसे करेंगे!

📢 खबरों को सबसे पहले पाने के लिए पर्वतजन को फॉलो करें

👉 WhatsApp Channel Join करें 👉 WhatsApp Group Join करें 📲 App Download करें

Related Posts