पिछड़े क्षेत्र की लड़ाई

हरिश्चन्द्र चंदोला

अब की बार चमोली जिले तथा उसकी जोशीमठ तहसील ने अपने को पिछडा क्षेत्र घोषित किए जाने के लिए आर-पार की लड़ाई छेड़ दी है। इस क्षेत्र्ा के लोगों का कहना है कि यदि उनका इलाका पिछड़ा क्षेत्र नहीं घोषित किया गया तो वह चुनाव में उसी प्रत्य्ाार्शी को वोट देंगे जो पिछड़ा क्षेत्र घोषित करवाने के लिए प्रतिबद्ध हो। इसके कारण चुनाव लड़ने वाले बहुत संकट में हैं। इस क्षेत्र के विधायक अभी कांग्रेस के राजेंद्र सिहं भंडारी, कृषि मंत्री हैं। वे बहुत कठिनाई हैं क्योंकि उनके चुनाव क्षेत्र का काफी बडा भाग यहीं पड़ता है।
यह क्षेत्र जनजाति का है और वास्तव में शिक्षा, स्वास्थ, नौकरी तथा खेती में काफी पिछड़ा है। जनजाति होने के कारण यहां आरक्षण केवल दो प्रतिशत है। इसमें श्री बद्रीनाथ, जोशीमठ आदि बहुत से तीर्थ पड़ते हैं तथा कई प्रसिद्ध, महत्वपूर्ण पर्यटन स्थल भी हैं। यह राजधानी को छोड़ राज्य का प्रमुख जिला है, जिसकी उपेक्षा नहीं की जा सकती।
इसको पिछड़ा क्षेत्र घोषित करने की पूरी तैयारियां हो चुकी थीं़़ मुख्य मंत्री, श्री हरीश रावत, को यहां जून ५ को गौरादेवी पर्यावरण एवं प्रकृति पर्यटन विकास मेला-२॰१६ मेले के उद्घाट्न के लिए आना था जिसमें उन्हें इस भूभाग को पिछड़ा क्षेत्र घोषित करना था। किन्तु मौसम खराब होने से श्री रावत यहां नहीं पहुंच सके और उनके स्थान पर विधायक भंडारी ने मेले का उद्घाटन तथा इसे पिछड़ा क्षेत्र होने की घोषणा की। जो शायद मानी नहीं गई। इस काम के लिए पिछड़ा क्षेत्र आयोग द्वारा मान्यता आवश्यक है, जो शायद अभी नहीं मिली है।
लेकिन इस क्षेत्र के निवासी अपना पूरा जोर लगाए हुए हैं कि इसे अभी, तुरंत पिछड़ा घोषित किये जाये। इसके लिए वह एक पखवाड़े से जोशीमठ तहसील के सामने प्रदर्शन, सभाएं, भूख-हड़ताल, इत्यादि कर रहे हैं।, इसके लिए इस क्षेत्र से एक प्रतिनिधि मंडल राजधानी में मुख्यमंत्री से मिलने हाल में ही गया था। उस वार्ता का क्या नतीज़ा निकला उसका खुलासा नहीं हो पाया है, लेकिन आंदोलन रुका नहीं है। ऐसा नहीं लगता है कि देहरादून में कोई समझौता हुआ हो।

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