बर्फबारी से खिले सेब की खेती करने वाले काश्तकारों के चेहरे

कमल जगाती, नैनीताल उत्तराखण्ड के पहाड़ी क्षेत्रों में हुई बर्फबारी से सेब की खेती करने वाले काश्तकारों के चेहरे खिल गए हैं। काश्तकारों का कहना है कि इससे सेब के अलावा खुमानी, पुलम, नाशपाती और अन्य फलों की खेती में भी फायदा होगा। नैनीताल जिले के पहाड़ी क्षेत्रों में लगभग 15 वर्षों के बाद इतनी […]

कमल जगाती, नैनीताल

उत्तराखण्ड के पहाड़ी क्षेत्रों में हुई बर्फबारी से सेब की खेती करने वाले काश्तकारों के चेहरे खिल गए हैं। काश्तकारों का कहना है कि इससे सेब के अलावा खुमानी, पुलम, नाशपाती और अन्य फलों की खेती में भी फायदा होगा।
नैनीताल जिले के पहाड़ी क्षेत्रों में लगभग 15 वर्षों के बाद इतनी भारी बर्फबारी से काश्तकारों के चेहरे खिले हुए है। रामगढ़, मुक्तेश्वर, धानाचूली, धारी, चांफी, पदमपुरी आदि क्षेत्रों में इस तरह से भारी बर्फबारी होने से सेब की अच्छी खेती होने की उम्मीद लगाई जा रही है। इस फलपट्टी से जुड़े काश्तकारों की माने तो इस बर्फबारी से इस वर्ष सेब समेत अन्य फलों का पैदावार बढ़ेगी।

काश्तकार नरेंद्र सिंह बिष्ट का कहना है कि सेब की पैदावार के लिए बहुत ही ज्यादा देखरेख की जरूरत होती है। सुंदर और मीठे सेब के लिए लगभग तीन माह तक उसे कूलिंग पीरियड या पॉइंट की जरूरत होती है। इस वर्ष नैनिताल जिले की फ्रूट बेल्ट में सेब आड़ू, खुमानी, पुलम, कीवी, नाशपाती जैसी फसलों के लिए बर्फबारी काफी अच्छी मात्रा में हुई है।

बताया जा रहा है कि पिछले 15 वर्षों के बाद इतनी ज्यादा बर्फबारी हुई है, जो फलों के लिए लाभदायक है। जिले के मुक्तेश्वर और रामगढ़ क्षेत्रों में लगभग एक फ़ीट बर्फबारी हुई, जिससे कीड़े और फलों को लगने वाली कई बीमारियां भी खत्म हो गई हैं।

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