एनएसओ रिपोर्ट मे उत्तराखंड में थी 14.2% बेरोजगारी। अब तीन लाख प्रवासियों से आया उछाल। योजनाओं मे तेजी जरूरी

एनएसओ रिपोर्ट मे उत्तराखंड में थी 14.2% बेरोजगारी। अब तीन लाख प्रवासियों से आया उछाल। योजनाओं मे तेजी जरूरी

मार्च 2019 तक की एनएसओ की रिपोर्ट के मुताबिक उत्तराखंड में शिक्षित युवा बेरोजगारों की संख्या में 14.2 तक फीसदी की बढ़ोतरी हो गई थी।
केंद्र सरकार की एजेंसी राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की मार्च 2019 तक की रिपोर्ट में वे तीन लाख से भी अधिक प्रवासी शामिल नहीं है जो लॉकडाउन के बाद उत्तराखंड लौटे हैं। इन युवाओं को कई स्थानों पर नरेगा के अंतर्गत भी रोजगार नहीं मिल सका है। और ना ही अब तक स्वरोजगार योजना पर प्रभावी गति देखने को मिली है। उत्तराखंड लौटे अधिकांश प्रवासी पढ़े लिखे और किसी न किसी हुनर में माहिर है।

उत्तराखंड में विगत तीन-चार सालों से ज्यादातर वैकेंसियां केवल अखबारों में ही देखने को मिल रही हैं।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने यह रिपोर्ट उत्तराखंड के 96 ब्लॉक के 750 परिवारों के सर्वे करके अलग-अलग समय पर तैयार की है। रोजगार देने के झूठे दावे से बेरोजगारों में काफी गुस्सा है। ह्यूमन डेवलपमेंट की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2012-17 के बीच 5 साल में स्वरोजगार करने वालों की संख्या में भी 12% से अधिक की कमी आ गई है।
वर्ष 2012 में 69% लोग स्वरोजगार कर रहे थे लेकिन वर्ष 2017 में यह प्रतिशत घटकर 56.96 हो चुका था।

हालांकि दैनिक वेतन भोगी रोजगार भी 6% बढ़ा है तथा नियमित रोजगार भी 7% तक बढ़ा है। लेकिन प्रदेश की आर्थिक तरक्की का केवल तीन मैदानी जिलों तक ही सिमट जाना बेरोजगारी की मुख्य वजह है। दो तिहाई लोग रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी और पिथौरागढ़, बागेश्वर, चंपावत जैसे सुदूर जिलों में स्वरोजगार कर रहे हैं। सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकोनामी (सीएमआईई) की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2018 में बेरोजगारी की रफ्तार 7.5% रही। यह राष्ट्रीय औसत 7.4 से अधिक था।

इस केंद्रीय संस्थान की रिपोर्ट के अनुसार पड़ोसी राज्य उत्तर प्रदेश में बेरोजगारी को कम करने में सफलता प्राप्त की है, साथ ही आंध्र प्रदेश और केरल में भी बेरोजगारी कम हुई है। एनएसओ की एक रिपोर्ट के मुताबिक हिमाचल की तुलना में खेती किसानी से उत्तराखंड में कमाने वाले लोगों की संख्या सबसे कम है। सीएमआईई की एक रिपोर्ट के अनुसार हालांकि सरकारी योजनाएं लोगों को स्वरोजगार करने में मदद कर रही हैं। लोग एन आर एल एम, एनयूएलएल तथा पर्यटन विकास की योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं।
लेकिन पहाड़ों में मुद्रा लोन का वितरण कम हुआ है।

पर्यटन मे पिछड़े

उत्तराखंड में पर्यटन भी काफी धीमी गति से चल रहा है, जबकि हिमाचल और जम्मू कश्मीर के विकास में वहां के पर्यटन का महत्वपूर्ण योगदान है। यहां तक कि पूर्वोत्तर के राज्यों का प्रदर्शन भी पर्यटन के क्षेत्र में उत्तराखंड से काफी बेहतर है।

उत्तराखंड के विकास में पर्यटकों का योगदान काफी कम है। सरकार पर्यटक बढ़ने के बावजूद उन से आर्थिक लाभ नहीं ले सकी। उत्तराखंड में फसल बीमा की योजनाएं भी किसानों के लिए लाभदायक नहीं हो रही है। उत्तरकाशी और उधम सिंह नगर में मात्र 6% कृषि ही बीमा के दायरे में आई है। जिन जिन मोर्चों पर सरकार पिछड़ रही है, वहां मेहनत करने की आवश्यकता है वरना उत्तराखंड की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय हो जाएगी।

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