यू.पी.में पी.सी.एस.(जे.)की उत्तर पुस्तिका बदलने के शिकायतकर्ता उत्तराखंडी श्रवण पाण्डे से एक्सक्लूसिव मुलाकात। पढ़ें क्या है ये मामला…

स्टोरी(कमल जगाती, नैनीताल):- यू.पी. पी.सी.एस.(जे.)परीक्षा में कई गड़बड़ियों का आरोप लगाने वाले अधिवक्ता श्रवण पाण्डे ऊत्तराखण्ड में बागेश्वर के रहने वाले हैं, जो इनदिनों नैनीताल स्थित उच्च न्यायालय में वकालत कर रहे हैं। श्रवण के साथ हुई एक एक्ससीलुसिव बातचीत के कुछ अंश आपके सामने रख रहे हैं।
बागेश्वर निवासी श्रवण पांडेय ने गुजरात नैशनल लॉ यूनिवर्सिटी से ग्रेज्युएशन की। वो इनदिनों नैनीताल उच्च न्यायालय में प्रेक्टिस कर रहे हैं। श्रवण के माता पिता हल्द्वानी में रहते हैं, जबकि वो न्यायालय के नजदीक भवाली में रह रहे हैं। श्रवण ने आरोप लगाया है कि अंग्रेजी विषय की कॉपी पर उनकी हैंड राइटिंग नहीं है और लेखनी भी नीली की जगह काली इंक से है। इतना ही नहीं, उन्होंने जो ऐसे लिखा था इस कॉपी में वो नहीं है। श्रवण के इस आरोप की अभी पुष्टि नहीं हुई है और आयोग हकीकत का पता लगाने के लिए पी.सी.एस.(जे.)मुख्य परीक्षा की 18 हजार से अधिक कॉपियों की जांच करवा रहा है। प्रतियोगी छात्रों ने राज्यपाल को लिखे पत्र में समीक्षा अधिकारी(आर.ओ.)/सहायक समीक्षा अधिकारी (ए.आर.ओ.)प्रारंभिक परीक्षा- 2023 में पेपर लीक का मुद्दा भी उठाया है। प्रतियोगियों का कहना कि जिस तरह पूर्व अध्यक्ष के कार्यकाल में परीक्षाओं में पेपर लीक और कॉपी की अदला-बदली के मामले सामने आए थे, उसी तरह स्थिति वर्तमान में भी है।।
श्रवण पांडेय के अनुसार पी.सी.एस.(जे.)मुख्य परीक्षा2022 में उन्होंने प्री निकालने के बाद मेन्स के 6 पेपर दिए। मार्क कम होने के कारण उन्होंने जानकारी आर.टी.आई.में मांगी, जिसके बाद उन्हें आयोग में बुलाया गया। वहां 5 कॉपियां तो उनकी थी, लेकिन अंग्रेजी सब्जेक्ट की कॉपी में ऐसे और लेखनी किसी दूसरे की थी और ये उनकी नीली की जगह काली इंक से लिखी गई थी, हालांकि मार्क्स 47 ही थे जो उन्हें मिले थे। आयोग ने उन्हें इस बात को लिखित देने को कहा तो श्रवण ने तुरंत ही लिखकर रिसीव भी करा लिया। कोई कार्यवाहीं नहीं होने से आहत श्रवण ने अलाहाबाद उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। उन्होंने ये भी कहा कि उनकी पहचान के एक और अभियर्थी की इसी तरह पुस्तक बदली गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि उन्हें जानबूझकर हिंदी में कम मार्क्स दिए गए हैं। उन्होंने शक जताया है कि उन्हें कम मार्क्स देकर इंटरव्यू में जाने से रोका गया है। श्रवण ने ये भी कहा कि न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की खंडपीठ ने 7 जून को हुई पिछली सुनवाई में आयोग से उनकी उत्तर पुस्तिकाएं पेश करने को कहा था, जो नहीं कि गई थी। मामले में अब अगली सुनवाई 1 जुलाई हो होनी तय है।
पी.सी.एस.(जे.)मुख्य परीक्षा- 2022 में कॉपी की अदला- बदली का मामला उत्तर प्रदेश राजभवन तक भी पहुंच गया। प्रतियोगी छात्रों ने राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को पत्र लिखकर इस पूरे मामले में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग(यू.पी.पी.एस.सी.)की कार्यप्रणाली और अध्यक्ष की भूमिका की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।

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