आंदोलन के तीसरे दिन सूचना विभाग के लिए पत्रकारों ने किया बुद्धि-शुद्धि यज्ञ

जयप्रकाश नौगाईं

शनिवार को पत्रकारों का ‘सूचना विभाग की दमनकारी नीतियों के खिलाफ बुद्धि शुद्धि यज्ञ’ सफलता संपन्न हो गया। इस दौरान भारी बारिश ने भी कुछ अवरोध पैदा किया, बावजूद इसके दर्जनों पत्रकार बुद्धि शुद्धि यज्ञ में शामिल हुए।
उत्तराखंड सूचना एवं लोक संपर्क विभाग द्वारा पत्रकारों के साथ दमनकारी नीति अपनाने के विरोध में पत्रकारों ने आज सूचना विभाग का बुद्धि शुद्धि यज्ञ आयोजित किया। इस अवसर पर पत्रकारों ने एकस्वर में कहा कि लघु समाचार पत्रों एवं न्यूज पोर्टल के साथ किए जा रहे सौतेला व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। साथ ही उत्तराखंड राज्य की छवि का ध्यान रखते हुए मसूरी कॉन्क्लेव के दौरान प्रदर्शन करने का निर्णय वापस ले लिया गया। पत्रकारों के धरने का आज यह तीसरा दिन था। सूचना निदेशालय में एकत्रित होकर बुद्धि शुद्धि यज्ञ आयोजित किया गया।


गौरतलब है कि सूचना विभाग लंबे समय से उत्तराखंड के पत्रकारों के साथ भेदभाव भरा व्यवहार कर रहा है तथा अपनी ही नीतियों को व्यक्तिगत लाभ के लिए तोड़ मरोड़ रहा है। उदाहरण के तौर पर सूचना विभाग की नियमावली के अनुसार हर साल नए समाचार पत्रों को सूचीबद्ध किया जाना था, लेकिन 5 वर्षों से नए अखबारों की सूची बद्धता नहीं की गई है।
इसी तरह से सूचना विभाग की एक और नियमावली के अनुसार हर 6 महीने में न्यूज़ पोर्टलों का एंपैनलमेंट किया जाना था, किंतु सूचना विभाग अपनी मनमानी चलाए रखने के लिए पिछले 2 वर्षों से एंपैनल करने का कार्य बंद किए हुए हैं।


पत्रकारों को इस बात पर भी रोष था कि यूं तो सूचना विभाग आंध्र प्रदेश, केरल और पश्चिमी बंगाल सहित विदेशी पत्रिकाओं को भी लाखों, करोड़ों के विज्ञापन प्रदान कर रहा है, लेकिन उत्तराखंड से प्रकाशित पत्र-पत्रिकाओं को अमर शहीद श्री देव सुमन के विशेष अवसर पर पिछले 18 वर्षों से दिया जा रहा विज्ञापन भी नहीं दिया गया, जबकि यह नियमावली में स्पष्ट उल्लेख है कि महापुरुषों तथा विशेष अवसरों पर दिए जाने वाले विज्ञापन किसी भी हालत पर रोके नहीं जाएंगे।
गौरतलब है कि पिछले काफी लंबे समय से सूचना विभाग सरकार के इशारे पर केवल चुनिंदा पत्र-पत्रिकाओं को ही नियम कायदे के विरुद्ध विज्ञापन जारी कर दे रहा है, लेकिन लघु एवं मध्यम समाचार पत्रों को नियमावली में स्पष्ट व्यवस्था के बावजूद छोड़ दिया जा रहा है।
पत्रकारों का कहना था कि यह एक कल्याणकारी सरकार से कतई अपेक्षित नहीं है तथा यह उत्तराखंडी प्रकाशनों के साथ सीधे-सीधे सौतेला पन है। पत्रकारों ने यह भी आवाज उठाई की संभवत यह भाजपा की एक सोची-समझी रणनीति हो सकती है कि ऐसे महापुरुषों को जो कि भाजपा की रीति नीति से मेल नहीं खाते उन्हें जानबूझकर नैपथ्य में डाल दिया जाए।
आने वाले वर्षों में सरकार आर्थिक तंगी के नाम पर उत्तराखंड के महापुरुषों जैसे कि हेमवती नंदन बहुगुणा से लेकर गोविंद बल्लभ पंत सरीखी विभूतियों को भी नजरअंदाज करने का षड्यंत्र कर सकती है।
एक तरीके से यह इतिहास को अपने तरीके से संचालित करने का सोचा समझा षडयंत्र हो सकता है। गौरतलब है कि कुछ दिन पहले सूचना निदेशालय से महात्मा गांधी की तस्वीर बैठक कक्ष से हटा दी गई थी किंतु जब पत्रकारों ने इस पर एतराज जताया तो फिर वह तस्वीर दोबारा से लगा दी गई।


पत्रकारों ने आज एकत्र होकर बुद्धि शुद्धि यज्ञ के माध्यम से सरकार को इस तरह की मानसिकता बदलने के प्रति चेताया है। और यह संदेश देने में सफल रहे कि यदि यह रवैया शीघ्र नहीं बदला गया तो सरकार की छवि को भी नुकसान हो सकता है।
आज के कार्यक्रम में भारी बरसात के बावजूद 3 दर्जन से अधिक पत्रकार शामिल हुए थे। बुद्धि शुद्धि यज्ञ में शामिल पत्रकारों की सूची ग्रुप में पहले दी जा चुकी है।

📢 खबरों को सबसे पहले पाने के लिए पर्वतजन को फॉलो करें

👉 WhatsApp Channel Join करें 👉 WhatsApp Group Join करें 📲 App Download करें

Related Posts