देहरादून में ‘लोक रंगउत्सव’ का भव्य आगाज हुआ, जहां देशभर की लोक कला, संगीत और जनजातीय परंपराएं एक मंच पर जीवंत हो उठीं।
यह सांस्कृतिक महोत्सव North Zone Cultural Centre Patiala (संस्कृति मंत्रालय) द्वारा आयोजित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत को जन-जन तक पहुंचाना है।
देहरादून बना सांस्कृतिक राजधानी
कार्यक्रम का आयोजन CIMS & UIHMT Group of Colleges में किया गया, जहां 25 मार्च से 30 मार्च 2026 तक चलने वाले इस उत्सव की शुरुआत हुई।
गढ़वाल मंडल में आयोजित इस महोत्सव में देशभर से आए कलाकारों ने रंगारंग प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
दीप प्रज्वलन के साथ हुआ शुभारंभ
उत्सव का शुभारंभ मुख्य अतिथि Ajay Kumar सहित कई गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया।
इस दौरान जरनैल सिंह, आदित्य चौहान, डॉक्टर राकेश भट्ट, ललित मोहन जोशी भी विशेष रूप से मौजूद रहे।
“एक भारत-श्रेष्ठ भारत” का संदेश
मुख्य अतिथि अजय कुमार ने कहा कि भारत की आत्मा उसकी लोक कला और संगीत में बसती है। उन्होंने ‘लोकरंग उत्सव’ को “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” के संकल्प को साकार करने वाला मंच बताया।साथ ही सांस्कृतिक विरासत और पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया
देशभर की लोक संस्कृति ने बांधा समां
उत्सव में विभिन्न राज्यों के कलाकारों ने शानदार प्रस्तुतियां दीं:
- उत्तराखंड: पारंपरिक लोक नृत्य और संगीत
- जम्मू-कश्मीर और हरियाणा: लोक गाथाएं
- उत्तर प्रदेश: मनमोहक मयूर नृत्य
- पंजाब: ऊर्जावान भांगड़ा
- गुजरात: रंग-बिरंगी वेशभूषा और लोकगीत
- राजस्थान: विलुप्त होती लोक कला का जीवंत प्रदर्शन
इन प्रस्तुतियों ने भारत की विविधता में एकता को मंच पर साकार कर दिया।
युवाओं को संस्कृति से जोड़ने का प्रयास
संस्थान के चेयरमैन ललित मोहन जोशी ने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ते हैं।
उन्होंने इसे संस्थान के लिए गर्व का विषय बताया कि उसे इस राष्ट्रीय स्तर के आयोजन की मेजबानी का अवसर मिला।
कलाकारों का सम्मान
कार्यक्रम के अंत में सभी कलाकारों और अतिथियों को स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया।
सहायक निदेशक जरनैल सिंह ने बताया कि यह उत्सव अगले चार दिनों तक गढ़वाल मंडल के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित किया जाएगा।
‘लोकरंग उत्सव 2026’ देहरादून में न केवल एक सांस्कृतिक आयोजन है, बल्कि यह भारत की समृद्ध लोक परंपराओं और राष्ट्रीय एकता का जीवंत प्रतीक बनकर उभरा है।
इस महोत्सव के जरिए देश की विविध लोक संस्कृति को एक मंच पर लाने का प्रयास सराहनीय है, जो आने वाले समय में भी सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करेगा।
