धराली आपदा: बेटी की जिद ने बचाई परिवार की जान। अब ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी देगा नि:शुल्क शिक्षा 

देहरादून, 10 अगस्त। उत्तरकाशी के धराली गांव में आई भीषण आपदा के बीच एक मार्मिक कहानी सामने आई है। यहां की जाह्नवी पंवार की मम्मी-पापा को ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी अपने साथ ले जाने की जिद ने पूरे परिवार की जान बचा ली। हादसे में उनका घर, 40 कमरों वाला होटल और सेब का बगीचा पूरी तरह तबाह हो गया, लेकिन परिवार सुरक्षित है। यूनिवर्सिटी ने जाह्नवी की पूरी शिक्षा निशुल्क करने का ऐलान किया है।

बेटी की जिद बनी जीवनदाता

जाह्नवी ने इस साल 12वीं पास करने के बाद ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में बीए ऑनर्स में दाखिला लेने का निर्णय लिया था। एडमिशन के लिए उसने मम्मी-पापा से देहरादून साथ चलने की जिद की। उनकी खुशी के लिए माता-पिता तैयार हो गए और उसी समय वे देहरादून में थे, जब धराली में आपदा ने कहर बरपा दिया।

जाह्नवी कहती हैं— “अगर मम्मी-पापा मेरी जिद पर मेरे साथ देहरादून न आए होते, तो न जाने क्या हो जाता।”

ग्राफिक एरा का बड़ा फैसला

एक प्रमुख न्यूज चैनल से जानकारी पाकर ग्राफिक एरा ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस के चेयरमैन डॉ. कमल घनशाला ने जाह्नवी के पिता जय भगवान सिंह पंवार से फोन पर बात कर संवेदना जताई। उन्होंने घोषणा की कि जाह्नवी से अब किसी भी सेमेस्टर में फीस नहीं ली जाएगी।

डॉ. घनशाला ने कहा— “धराली आपदा से पीड़ित अन्य परिवारों के बच्चों की जानकारी मिलने पर, उनके लिए भी इसी तरह के निर्णय पर विचार किया जाएगा।”

मदद की परंपरा

डॉ. घनशाला पहले भी 2012 उत्तरकाशी आपदा, 2013 केदारनाथ त्रासदी और जोशीमठ आपदा में राहत कार्यों में अग्रणी भूमिका निभा चुके हैं। जोशीमठ के रैंणी गांव की आपदा में बेघर हुई एक वृद्धा को उन्होंने मकान बनाकर दिया, साथ ही कई छात्रों को बीटेक से लेकर पीएचडी तक निशुल्क शिक्षा प्रदान की।

शिक्षकों और छात्रों ने इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि डॉ. घनशाला के ऐसे फैसले न केवल प्रेरणादायक हैं, बल्कि छात्रों को अच्छा इंसान बनने की सीख भी देते हैं।

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