अमेरिका-ईरान तनाव के चलते वैश्विक ऊर्जा संकट गहराने की आशंका के बीच भारत सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (Excise Duty) में बड़ी कटौती की है।
हालांकि इस फैसले के बावजूद आम लोगों को तुरंत राहत मिलने की संभावना कम नजर आ रही है।
पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कटौती
सरकार के नए आदेश के अनुसार:
- पेट्रोल पर अतिरिक्त उत्पाद शुल्क 13 रुपये से घटाकर 3 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है
- डीजल पर उत्पाद शुल्क 10 रुपये से घटाकर शून्य कर दिया गया है
यह कदम ईंधन की बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से उठाया गया है।
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वैश्विक संकट की बड़ी वजह
अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट पर नाकाबंदी कर दी है, जिससे वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ा है।
यह मार्ग इसलिए अहम है:
- दुनिया के कुल तेल का लगभग 20% हिस्सा यहीं से गुजरता है
- रोजाना 20–25 मिलियन बैरल कच्चा तेल सप्लाई होता है
- करीब 10 अरब घन फुट गैस इसी रास्ते से भेजी जाती है
ATF पर पहली बार स्पेशल टैक्स लागू
सरकार ने पहली बार Aviation Turbine Fuel (ATF) पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज ड्यूटी लागू की है।
- ATF पर तय टैक्स: ₹50 प्रति लीटर
- छूट के बाद प्रभावी दर: ₹29.5 प्रति लीटर
इससे एयरलाइंस की लागत बढ़ सकती है और हवाई टिकट महंगे होने की आशंका है।
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घरेलू तेल कंपनियों को बड़ी राहत
सरकार ने तेल कंपनियों को राहत देने के लिए कई अहम फैसले लिए हैं:
- पेट्रोल पर टैक्स शून्य रखा गया
- डीजल पर ₹18.5 प्रति लीटर की दर तय
- पेट्रोल, डीजल और ATF के निर्यात पर कई शुल्क हटाए गए
- 2022 में लागू विंडफॉल टैक्स समाप्त कर दिया गया
ये सभी बदलाव 26 मार्च 2026 से लागू हो चुके हैं।
क्या सस्ते होंगे पेट्रोल-डीजल?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अब पेट्रोल और डीजल सस्ते होंगे?
फिलहाल जवाब: संभावना बहुत कम है
क्यों नहीं घटेंगे दाम?
- अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत $100 प्रति बैरल से ऊपर
- तेल कंपनियों को प्रति लीटर करीब ₹48.8 का नुकसान
ऐसे में सरकार की ओर से दी गई राहत का इस्तेमाल कंपनियां अपने घाटे को कम करने में करेंगी, न कि सीधे कीमत घटाने में।
सरकार की ओर से एक्साइज ड्यूटी में कटौती एक महत्वपूर्ण कदम है, लेकिन इसका सीधा फायदा आम उपभोक्ताओं को तुरंत नहीं मिलेगा। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कमी तब संभव है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें स्थिर हों।
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