हरिद्वार के कुछ आश्रमों में होता है कालेधन को सफेद करने का खेल

गुरुपूर्णिमा पर हरिद्वार के आश्रमों में ‘श्रद्धा’ के साथ बरसता है ‘धन’

कुमार दुष्यंत/हरिद्वार

गुरुपूर्णिमा के अवसर पर धर्मनगरी हरिद्वार के आश्रमों, गुरु स्थानों, संत स्थलों पर देशभर से भक्तों व अनुयायियों का मेला लगता है। इस दौरान इन आश्रमों में श्रद्धा के साथ-साथ धन की भी वर्षा होती है और दान के नाम पर धन को स्याह-सफेद करने का बड़ा खेल होता है।
हरिद्वार के अनेक आश्रम, आध्यात्म व मार्गदर्शन के केंद्र हैं। कुछ योग व तंत्र साधना के लिए भी जाने जाते हैं। कई आश्रमों व संतों के अनुयायी विदेशों में भी हैं, लेकिन देश-विदेश में भारतीय अध्यात्म की पताका फहरा रहे इन श्रद्धा के केंद्रों से अलग कुछ ऐसे भी आश्रम व तथाकथित भक्ति केंद्र हैं, जो भक्तों को काले और सफेद धन का गणित समझा कर उनका व अपना कल्याण कर रहे हैं।

गुरु पूर्णिमा के मौके पर जब यहां देश-विदेश के भक्त ऐसे ‘गुरूओं’ के आगे माथा टेकने पहुंचते हैं, तब स्याह धन को सफेद करने का भी बड़ा खेल होता है।
धर्मनगरी के ज्यादातर आश्रम आयकर की धारा 80 जी के तहत अपने भक्तों से दान प्राप्त करते हैं। इसके तहत दानदाता क़ो आय में पचास फीसदी की छूट मिलती है। इस पचास फीसदी में ही कुछ आश्रम अपना कमीशन लेकर भक्तों का उद्धार कर देते हैं। धारा 12 ए व विदेशी मुद्रा विनिमय की धारा एफसीआरए में, क्योंकि 80 जी के मुकाबले आय छूट दुगुनी है। इसलिए इसमें विदेशी भक्तों से दान के नाम पर ओर मोटा खेल होता है और भक्तों व दान लेने वाली संस्थाएं करोड़ों का काला, सफेद करती हैं।


गुरु पूर्णिमा के मौके पर हरिद्वार के विभिन्न आश्रमों में विदेशों के साथ-साथ दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, मुंबई, गाजियाबाद व नोएडा जैसे शहरों से बडे उद्धोगपति अपने गुरुओं को शीष नवाने पहुंचते हैं और आशीर्वाद में करोड़ोंं  का काला, सफेद कर लौटते हैं।

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