देश में पहली बार ‘पैसिव इच्छामृत्यु’ की अनुमति मिलने के बाद चर्चा में आए हरीश राणा का मंगलवार, 24 मार्च 2026 को निधन हो गया।
उन्होंने All India Institute of Medical Sciences (AIIMS) दिल्ली में इच्छामृत्यु प्रक्रिया शुरू होने के 11वें दिन अंतिम सांस ली।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शुरू हुई प्रक्रिया
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को ‘Passive Euthanasia’ (निष्क्रिय इच्छामृत्यु) की अनुमति दी थी।
11 मार्च को आए इस ऐतिहासिक फैसले के बाद 16 मार्च से उनकी इच्छामृत्यु प्रक्रिया शुरू की गई थी।
कैसे हुई इच्छामृत्यु की प्रक्रिया?
AIIMS में भर्ती होने के बाद डॉक्टरों की निगरानी में उनकी जीवन रक्षक प्रणाली धीरे-धीरे हटाई गई:
- न्यूट्रिशन सपोर्ट (ट्यूब फीडिंग) बंद किया गया।
- बाद में पानी देना भी बंद किया गया।
- वेंटिलेटर सपोर्ट नहीं दिया गया।
- केवल आवश्यक दवाइयां दी जाती रहीं।
इस पूरी प्रक्रिया को गरिमा और मेडिकल प्रोटोकॉल के तहत अंजाम दिया गया।
13 साल से कोमा में थे हरीश राणा
गाजियाबाद निवासी हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से कोमा में थे और जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष कर रहे थे।
हाल ही में उनका 32वां जन्मदिन भी मनाया गया था, जिसके बाद परिवार ने कोर्ट के फैसले के अनुसार इच्छामृत्यु का निर्णय लिया।
देश का पहला मामला बना
हरीश राणा भारत में ऐसे पहले व्यक्ति बन गए, जिन्हें सुप्रीम कोर्ट की अनुमति से निष्क्रिय इच्छामृत्यु दी गई।
कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा था कि जीवन रक्षक उपकरण हटाने की प्रक्रिया पूरी संवेदनशीलता और गरिमा के साथ की जाए।
परिवार ने दी अंतिम विदाई
इच्छामृत्यु की प्रक्रिया शुरू होने से पहले परिवार ने उन्हें अंतिम विदाई दी और AIIMS में भर्ती कराया गया था।
11 दिन तक चली इस प्रक्रिया के बाद आखिरकार 24 मार्च को उनका निधन हो गया।
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