खुलासा : स्वास्थ्य मंत्री की विधानसभा में खुली स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल,टूटे हुए हाथ पर प्लास्टर की जगह लगा दिया गत्ता

अनुज नेगी पौड़ी।प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का हाल किसी से छिपा नहीं है। राज्य गठन के 22 वर्ष बीत जाने के बाद भी स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर यहाँ पर केवल हवा हवाई दवे किए जाते हैं।  ताजा मामला स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत की विधानसभा क्षेत्र का है जहां पर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य […]

अनुज नेगी

पौड़ी।प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का हाल किसी से छिपा नहीं है। राज्य गठन के 22 वर्ष बीत जाने के बाद भी स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर यहाँ पर केवल हवा हवाई दवे किए जाते हैं। 

ताजा मामला स्वास्थ्य मंत्री डॉ धन सिंह रावत की विधानसभा क्षेत्र का है जहां पर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाबौ में सोमवार शाम सेंजी गांव की ग्रामीण महिला विमला देवी स्वास्थ्य उपचार के लिए पहुंची। जिनका हाथ जंगल में घास काटते वक्त गिरकर फैक्चर हो गया था। विमला देवी अपने परिजनों के साथ आपने टूटे हुए हाथ को दिखाने के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाबौ पहुंची।

पशु चारा काटते समय गिरने के कारण विमला देवी को चोटें भी आई थी,जिस कारण उन्हें सात से आठ टांके भी लगाए गए। स्वास्थ्य उपचार के दौरान विमला देवी के हाथ पर प्लास्टर लगाने की जगह उनके हाथ पर स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा गत्ता बांध दिया गया और उन्हें बेहतर उपचार के लिए जिला अस्पताल पौड़ी जाने की सलाह दी गई। घायल विमला देवी आपने हाथ में गत्ता लटका कर अपने परिजनों के साथ में जिला अस्पताल पौड़ी के लिए निकल पड़ी। यह हाल स्वास्थ्य मंत्री की विधानसभा क्षेत्र के पीपीपी यानी पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मोड में संचालित हो रही सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पाबौ का है तो इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि प्रदेश के अन्य अस्पतालों में किस तरह की सुविधाएं ग्रामीण और आमजन लोगों को उपलब्ध हो रही होगी।

इस पूरे मामले पर कांग्रेस की प्रदेश प्रवक्ता राजेश चमोली ने स्वास्थ्य मंत्री व स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। राजेश चमोली ने कहा कि जब स्वास्थ्य मंत्री की गृह जनपद व विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का यह हाल है तो इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है प्रदेश के अन्य ग्रामीण इलाकों व क्षेत्रों में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं का क्या हाल होगा। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के नाम पर केवल बिल्डिंग खड़ी करने का काम प्रदेश सरकार द्वारा किया जा रहा है और बिल्डिंग खड़ी होने के बाद संबंधित केंद्रों में ना तो सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही है और ना ही स्टाफ उपलब्ध कराया जा रहा है। जिसके कारण इस तरह की घटनाएं लगातार सामने आ रही है।

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