उत्तरकाशी, 1 अगस्त 2026। नीरज उत्तराखंडी
उत्तरकाशी पुलिस ने साइबर अपराध के एक मामले में उल्लेखनीय सफलता हासिल करते हुए साइबर ठगी के शिकार व्यक्ति की ₹7.40 लाख की पूरी धनराशि वापस दिलाई है। त्वरित कार्रवाई और तकनीकी समन्वय के चलते पीड़ित को बड़ी राहत मिली है।
पुलिस अधीक्षक श्रीमती कमलेश उपाध्याय के निर्देशन में साइबर अपराधों पर प्रभावी अंकुश लगाने और पीड़ितों को शीघ्र न्याय दिलाने के लिए उत्तरकाशी पुलिस लगातार सक्रिय है। इसी क्रम में जून 2026 में नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (NCRP) के माध्यम से ₹7,40,000 की साइबर वित्तीय धोखाधड़ी की शिकायत प्राप्त हुई थी।
शिकायत मिलते ही कोतवाली उत्तरकाशी और साइबर सेल की संयुक्त टीम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित बैंकों, संदिग्ध मोबाइल नंबरों और अन्य तकनीकी माध्यमों से प्राप्त सूचनाओं का गहन विश्लेषण किया। विभिन्न एजेंसियों और बैंकिंग संस्थानों के साथ त्वरित समन्वय स्थापित कर प्रभावी कार्रवाई की गई। लगातार प्रयासों के परिणामस्वरूप साइबर ठगी में चली गई ₹7.40 लाख की पूरी राशि शिकायतकर्ता के खाते में वापस करा दी गई।
पूरी धनराशि वापस मिलने पर शिकायतकर्ता ने उत्तरकाशी पुलिस और साइबर सेल का आभार व्यक्त करते हुए उनकी त्वरित, संवेदनशील एवं प्रभावी कार्यप्रणाली की सराहना की।
इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक श्रीमती कमलेश उपाध्याय ने आमजन से साइबर अपराधों के प्रति सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधी लोगों को ठगी का शिकार बनाने के लिए लगातार नए-नए तरीके अपना रहे हैं, इसलिए किसी भी अनजान व्यक्ति के फोन, वीडियो कॉल या ऑनलाइन संदेश पर बिना सत्यापन विश्वास न करें।
उन्होंने लोगों से लालच भरे ऑफर, फर्जी निवेश योजनाओं, संदिग्ध लिंक, ई-मेल और एसएमएस से सावधान रहने, बैंक खाते की गोपनीय जानकारी, ओटीपी, सीवीवी, यूपीआई पिन और पासवर्ड किसी के साथ साझा न करने तथा अज्ञात क्यूआर कोड स्कैन करने या अनधिकृत ऐप डाउनलोड करने से बचने की सलाह दी।
पुलिस ने यह भी कहा कि यदि किसी भी प्रकार की साइबर या वित्तीय धोखाधड़ी होती है तो ‘गोल्डन आवर’ का विशेष ध्यान रखते हुए तत्काल साइबर हेल्पलाइन 1930 या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज कराएं। समय पर शिकायत करने से ठगी गई धनराशि वापस मिलने की संभावना काफी बढ़ जाती है।







