काठमांडू से एक बड़ी खबर सामने आई है, जहां नेपाल की राजनीति में अचानक भूचाल आ गया है।
पूर्व प्रधानमंत्री के पी शर्मा ओली और नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व पूर्व गृहमंत्री रमेश लेखक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
दोनों नेताओं पर सितंबर 2025 में हुए Gen-Z प्रदर्शनों को दबाने में कथित आपराधिक लापरवाही के आरोप हैं।
किन आरोपों में हुई गिरफ्तारी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन दोनों नेताओं के खिलाफ राष्ट्रीय दंड संहिता की धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है।
अगर दोष सिद्ध होता है, तो उन्हें अधिकतम 10 साल तक की सजा हो सकती है।
यह कार्रवाई एक विशेष जांच आयोग की सिफारिशों के आधार पर की गई है, जिसने प्रशासनिक लापरवाही को हिंसा का बड़ा कारण बताया है।
बालेन शाह के प्रधानमंत्री पद संभालने के एक दिन बाद ही यह हाई-प्रोफाइल कार्रवाई हुई है।
हालांकि अधिकारियों का कहना है कि इस गिरफ्तारी की प्रक्रिया पहले ही शुरू हो चुकी थी और गृह मंत्रालय में दर्ज शिकायत के आधार पर जांच चल रही थी।
कैबिनेट बैठक में आयोग की रिपोर्ट लागू करने का फैसला लिए जाने के बाद इन गिरफ्तारियों का रास्ता साफ हुआ।
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क्या था Gen-Z प्रदर्शन का मामला
सितंबर 2025 में नेपाल में Gen-Z युवाओं ने सोशल मीडिया बैन के खिलाफ बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया था।
देखते ही देखते यह आंदोलन हिंसक हो गया, जिसमें कुल 77 लोगों की मौत हो गई थी।
हालात इतने बिगड़ गए थे कि मंत्रियों को हेलीकॉप्टर से निकालना पड़ा और संसद भवन समेत कई सरकारी व निजी संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा था।
अन्य अधिकारियों पर भी गिरी गाज
जांच आयोग की रिपोर्ट में कई अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं।
इनमें तत्कालीन गृह सचिव, पुलिस और जांच एजेंसियों के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि खुफिया जानकारी होने के बावजूद प्रशासन हालात संभालने में नाकाम रहा, जिसके चलते प्रदर्शन हिंसक हो गया।
केपी ओली की गिरफ्तारी को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अहम माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ओली का झुकाव चीन की ओर रहा है, ऐसे में यह घटनाक्रम क्षेत्रीय राजनीति पर भी असर डाल सकता है।
नेपाल में हुई ये हाई-प्रोफाइल गिरफ्तारियां देश की राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत दे रही हैं।
अब सभी की नजर आगे की कानूनी प्रक्रिया और राजनीतिक असर पर टिकी हुई है।
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