स्टोरी(कमल जगाती, नैनीताल):-
ऊत्तराखण्ड में नैनीताल प्रशासन के निर्देश पर मुख्य शिक्षा अधिकारी ने 17 निजी विद्यालयों को महंगी किताबों और अवैध फीस वसूली पर नोटिस जारी किया है।
नैनीताल जिले के निजी स्कूलों की अवैध फीस वसूली और महंगी किताब खरीदने के दबाव की शिकायत पर जिला प्रशासन कड़क हो गया।
शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और अभिभावकों पर पड़ रहे अनावश्यक आर्थिक बोझ को कम करने के उद्देश्य से जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के निर्देशन पर बड़ी कार्रवाई अमल में लाई गई।
मुख्य शिक्षाधिकारी गोविंद राम जायसवाल ने हल्द्वानी, रामनगर और भीमताल क्षेत्र के 17 निजी विद्यालयों को नोटिस जारी किया है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि कई निजी विद्यालय एन.सी.ई.आर.टी.पाठ्यक्रम के अलावा महंगी निजी प्रकाशनों की पुस्तकें अनिवार्य कर रहे हैं। इससे अभिभावकों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ पड़ रहा है।
साथ ही कुछ विद्यालयों ने तो अपनी चहेती दुकानों से ही किताबें व शैक्षिक सामग्री खरीदने के लिए दबाव बनाया है। मुख्य शिक्षा अधिकारी कार्यालय से निम्न विद्यालयों को नोटिस भेजा गया है।
इसमें, देवभूमि सीनियर सेकेंडरी स्कूल मानपुर पश्चिम, गुरु द्रोणा पब्लिक स्कूल हल्द्वानी, लक्ष्य इंटरनेशनल स्कूल, बी.एल.एम. एकेडमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, वुडब्रिज स्कूल भीमताल, मल्लिकार्जुन स्कूल भीमताल, सेंट जोसेफ कॉन्वेंट स्कूल पीरुमदारा रामनगर, ग्रेट मिशन पब्लिक स्कूल रामनगर, गार्डन वैली पब्लिक स्कूल रामनगर, आर्यमन विक्रम बिड़ला स्कूल हल्द्वानी, दून पब्लिक स्कूल नवाबी रोड, विस्डम पब्लिक स्कूल रामपुर रोड, इंस्पिरेशन सीनियर सेकेंडरी स्कूल, एस.के.एम.सीनियर सेकेंडरी स्कूल रामपुर रोड, किंग्सफोर्ड सीनियर सेकेंडरी स्कूल, शेमफोर्ड सीनियर सेकेंडरी स्कूल मोटाहल्दू तथा हिमालया विद्या मंदिर सीनियर सेकेंडरी स्कूल शामिल हैं।
जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग की जांच में सामने आई अनियमितताओं में एन.सी.ई.आर.टी.के अलावा महंगी निजी पुस्तकों की अनिवार्यता, किताबों का अनुपात कई कक्षाओं में दो-तीन गुना अधिक, विशेष दुकानों/विक्रेताओं से खरीदारी के लिए दबाव, विद्यालय वैबसाइट पर अनिवार्य सूचनाओं का अभाव आदि मुख्य हैं।
आदेश में राइट टू एजुकेशन(आर.टी.ई.) 2009, सी.बी.एस.सी.दिशा-निर्देश एवं कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2019 का हवाला देते हुए इसे नियमों का उल्लंघन और अनुचित व्यापार व्यवहार बताया गया है।
सीईओ के अपने सख्त निर्देश जारी करते हुए चेतावनी दी है कि15 दिन के भीतर संशोधित बुक लिस्ट जारी करें, केवल आवश्यक व एन.सी.ई.आर.टी.आधारित पुस्तकों को ही प्राथमिकता दें, वेंडर/दुकान की अनिवार्यता तत्काल खत्म करें, वैबसाइट पर बुक लिस्ट व फीस संरचना सार्वजनिक करें।
अतिरिक्त शुल्क का समायोजन/रिफंड करें। उहोने नियमों का पालन न करने पर मान्यता निलंबन/समाप्ति, जुर्माना व अन्य कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी है। साथ ही 15 दिन के भीतर संयुक्त जांच समिति द्वारा निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया है।




