एक्सक्लूसिव: सिपाही बोला “यहां रूल नही बड़े लोगों के फोन चलते हैं।” अफसर बोले “औकात मे रहो।” काबिल सिपाही ने मांगी सेवानिवृत्ति

अमित तोमर #विरुद्ध 

एक कर्तव्यनिष्ठ पुलिस के सिपाही की व्यथा। 10 साल की बेदाग़ नौकरी के पश्चात क्यों सेनानिवृति मांग रहा यह सिपाही ? जवाब आपके दिमाग को हिला कर रख देगा।


यह कोई आम सिपाही नही अपितु Arjun Singh Rawat है, जिसने पूरे पुलिस विभाग और समाज के सामने उत्कृष्ट पुलिसिंग की नज़ीर पेश की है। यहाँ तक कि उत्तराखंड पुलिस के DGP श्री अनिल रतूड़ी जी का भी यातायात उलंघन पर बेबाकी से चालान कर दिया था, बिना सोचे कि आगे क्या होगा। वो बात अलग है कि आदरणीय रतूड़ी जी ने चालान करवा इस पुलिसकर्मी को समान्नित किया था।


2009 बैच में उत्तराखंड पुलिस में भर्ती हुआ टिहरी निवासी अर्जुन रिज़र्व बटालियन में रहा और फिर कुछ वर्ष उपरांत CPU का हिस्सा बना। अदम्य साहस और कर्तव्यपरायणता से लबरेज़ अर्जुन जब देहरादून की राजनैतिक सड़कों पर उतरा तो उसे एहसास नही था कि शहर में कानून नही नेताओं का राज है यहां Cr.P.C (भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता), Police Act और यातायात नियमावली नही चलती अपितु बड़े लोगों के फोन चलते है जिनके गुलाम पुलिस के उच्च अधिकारी है जो अपनी नौकरी बचाने को इन अनपढ़ दलालों की चाकरी तक सीमित है।

अर्जुन ने सभी नोडल एजेंसियों को पत्र लिख यातायात प्रक्रिया पर प्रश्न उठाये पर बदले में उच्च अधिकारियों ने अर्जुन को अपनी ‘औकात’ में रहने की नसीहत दे डाली। 22 साल का उत्तराखण्ड का युवक अर्जुन यह सोच 2009 में पुलिस में भर्ती हुआ था कि एक दिन वो देश के संविधान से इस कैंसर पीड़ित लाल फीताशाही सिस्टम को ठीक कर देगा। हुआ ऐसा कि पुलिस विभाग की उपेक्षा से त्रस्त हो अर्जुन ने CPU छोड़ SDRF में नियुक्ति हेतु प्रार्थना की जो स्वीकार हो भी गयी और अर्जुन को ऋषिकेश में तैनाती मिली। वहां भी वही साहिब और वही चाटुकारिता। अन्तः अर्जुन ने पुलिस विभाग छोड़ने के लिए प्रार्थना कर दी। और समाज ने एक कर्तव्यनिष्ठ स्वाभिमानी पुलिसकर्मी को खो दिया।

दुखद है जब ऐसा होनहार युवक पुलिस विभाग को छोड़ दे।
माने या ना माने पर उत्तराखण्ड पुलिस विभाग में ईमानदार लोगों के लिए शायद कोई जगह ही नही बची। या तो ईमानदार अफसरों को सड़ाया जाता है या फिर उन्हें इतना मानसिक उत्पीड़न मिलता है कि वो ईमान बेचने को मजबूर हो जाते है।
जो ईमान नही बेचते वो अर्जुन बन जाते है।

विनती है उत्तराखण्डी समाज से कि ऐसे कर्तव्यनिष्ठ बेटों के लिए लड़ें, जो केवल इसलिए नौकरी छोड़ रहे क्योंकि वह भ्रष्ठ नही होना चाहते।
प्यारे अनुज, अर्जुन सिंह रावत आपको दिल से सलाम। जय हिन्द

 

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