मोरी/ उत्तरकाशी 5मई2026
रिपोर्ट -नीरज उत्तराखंडी
जनपद उत्तरकाशी के विकासखंड मोरी में सार्वजनिक शौचालय निर्माण के लिए आरक्षित वन भूमि के उपयोग का प्रस्ताव केंद्र स्तर पर अटक गया है। यह प्रस्ताव भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के क्षेत्रीय कार्यालय देहरादून को भेजा गया था, जिसमें 0.0096 हेक्टेयर वन भूमि को गैर-वानिकी कार्य हेतु प्रत्यावर्तित करने की मांग की गई थी।
प्रमुख वन संरक्षक एवं नोडल अधिकारी (वन संरक्षण), उत्तराखण्ड द्वारा ऑनलाइन आईडी FP/UK/OTHERS/418478/2023 के माध्यम से प्रस्ताव केंद्र को प्रेषित किया गया था। हालांकि, सहायक महानिरीक्षक (वन) द्वारा 6 जून 2023 को जारी पत्र में स्पष्ट किया गया कि प्रस्तावित गतिविधि “नॉन-साइट स्पेसिफिक” श्रेणी में आती है, जिस पर वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के तहत अनुमोदन संभव नहीं है। मंत्रालय ने निर्देश दिया कि ऐसे कार्यों के लिए गैर-वन भूमि का चयन किया जाए।
इस संबंध में वर्ष 2026 में राज्य स्तर से पुनः पत्राचार किया गया। प्रमुख वन संरक्षक, टौंस वन प्रभाग के प्रभागीय वनाधिकारी और खंड विकास अधिकारी मोरी ने अपने पत्रों में बताया कि प्रस्तावित स्थल मुख्य सड़क मार्ग के समीप स्थित है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीणों और यात्रियों का आवागमन होता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आसपास कोई उपयुक्त गैर-वन भूमि उपलब्ध नहीं है, जिससे वैकल्पिक स्थल का चयन व्यवहारिक रूप से संभव नहीं हो पा रहा है।
प्रयोक्ता विभाग ने यह भी तर्क दिया है कि यह निर्माण कार्य केंद्र सरकार के स्वच्छ भारत मिशन के तहत अत्यंत आवश्यक है, जिससे खुले में शौच की समस्या पर रोक लगाई जा सके और यात्रियों को मूलभूत सुविधाएं मिल सकें। अब यह मामला केंद्र सरकार के स्तर पर विचाराधीन है। स्थानीय प्रशासन और वन विभाग वैकल्पिक समाधान तलाशने में जुटे हैं, ताकि पर्यावरणीय नियमों का पालन करते हुए जनहित की इस आवश्यकता को पूरा किया जा सके।




