जल संकट के समाधान को वर्षा जल संरक्षण जरूरी

भारत में जल संरक्षण गढ़वाल विश्वविद्यालय की राजनीति विज्ञान विभाग में भारत में जल संरक्षण महत्व एवं चुनौतियां विषय पर परिचर्चा की गई। वर्तमान समय में जल संकट से दुनियाभर में समस्याओं का सामना किया जा रहा है। हिंदुस्तान भी इस संकट से अछूता नहीं रहा। चेन्नई में जल संकट ने भारत में एक बड़ी बहस शुरू कर दी है। यह संकट शहरों से बढ़कर गांव की तरफ लगातार बढ़ता जा रहा है, जो कि एक बड़ी चिंता का विषय है।
इस मौके पर वरिष्ठ प्रोफेसर सीएस सूद ने कहा कि तापमान में वृद्धि के कारण ग्लेशियर लगातार पिघल रहे हैं, जो कि जल संकट को भविष्य में और बढ़ाएगा। जल संकट के समाधान के लिए शहरों को व्यवस्थित रूप से बसाने की जरूरत है, जिसमें वर्षा जल संरक्षण की भी पूरी व्यवस्था होनी चाहिए।
प्रोफेसर आरएन गैरोला ने कहा कि पानी के प्राकृतिक स्रोत लगातार खत्म हो रहे हैं, जो कि अलग-अलग समस्याएं लेकर हमारे सामने हैं। सरकार की जल संरक्षण की नीतियां लोगों तक क्रियान्वित नहीं हो पा रही हैं। जल जंगल जमीन को एक साथ संरक्षित किए हम जल संकट से निजात नहीं पा सकते। जल संरक्षण के लिए हमें अपने घरों से शुरू शुरुआत करनी होगी।
प्रोफ़ेसर एमएम सेमवाल ने कहा कि पानी का सबसे बड़ा केंद्र हिमालय है। इसे एशिया का वाटर पावर कहा जाता है, लेकिन जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियार लगातार पिघल रहे हैं। पानी में प्राकृतिक रूप से कोई कमी नहीं आई है, लेकिन भूजल में जरूर कमी हो गई है। इसका कारण है कि हम वर्षा जल को संरक्षित नहीं कर पा रहे हैं और न ही अपने प्राकृतिक जल संरक्षण के स्रोतों को जल संरक्षण के लिए तालाब और छोटे-छोटे चेकडैम का निर्माण कर रहे हैं।

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