{महेश चंद्र पंत/रुद्रपुर}
रुद्रपुर नगर निगम क्षेत्र में रसोई गैस संकट अब अव्यवस्था और कालाबाजारी का बड़ा खेल बन चुका है।
आधिकारिक तौर पर सिलेंडर की कीमत करीब ₹930 है, लेकिन गली-मोहल्लों में गैस ₹300 प्रति किलो तक खुलेआम बेची जा रही है।
एक सिलेंडर पर ₹4000 से अधिक मुनाफा कमाने की होड़ ने हालात को भयावह बना दिया है।
इंडेन, भारत और एचपी कंपनियों के एक-दो ट्रक प्रतिदिन की आपूर्ति, बढ़ती आबादी के सामने नाकाफी साबित हो रही है।
दूसरी ओर, एजेंसियों द्वारा ई-रिक्शा से सीमित वितरण (महज 18-20 सिलेंडर) ने आम उपभोक्ताओं की परेशानी बढ़ा दी है।
आरोप है कि एजेंसी ठेकेदारों और स्थानीय कालाबाजारियों के बीच मजबूत सांठगांठ है, जिससे कृत्रिम कमी पैदा कर कीमतें बढ़ाई जा रही हैं।
स्थिति की गंभीरता तब सामने आई जब स्थानीय विधायक शिव अरोड़ा का सिलेंडर भी कथित तौर पर ब्लैक में बेच दिया गया।
बावजूद इसके, प्रशासन और पुलिस की निष्क्रियता सवालों के घेरे में है।
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समाधान के प्रमुख बिंदु:
- दैनिक गैस आपूर्ति बढ़ाई जाए और पारदर्शी वितरण सुनिश्चित हो
- कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई और छापेमारी अभियान चलें
- ऑनलाइन ट्रैकिंग व टोकन सिस्टम लागू किया जाए
- जनप्रतिनिधि व प्रशासन संयुक्त निगरानी तंत्र बनाएं
यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह संकट जनआक्रोश में बदल सकता है।
