नेहरू पर्वतारोहण संस्थान पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप, शासन तक पहुंची 60 पन्नों की रिपोर्ट

उत्तरकाशी। नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (NIM) उत्तरकाशी में कथित भ्रष्टाचार, फर्जी नियुक्तियों और वित्तीय अनियमितताओं का मामला अब गंभीर प्रशासनिक स्तर तक पहुंच गया है। जिलाधिकारी की जांच रिपोर्ट में संस्थान पर लगाए गए कई आरोप प्रथम दृष्टया सही पाए जाने के बाद पूरी रिपोर्ट खेल निदेशालय को कार्रवाई के लिए भेज दी गई है। हालांकि, अब तक शासन स्तर पर किसी ठोस कार्रवाई के संकेत नहीं मिले हैं।

जानकारी के अनुसार संस्थान के रजिस्ट्रार पर खेल अधिकारी को भ्रामक और गलत सूचनाएं देने के आरोप लगे हैं। वहीं संविदा नियुक्तियों, प्रमोशन और वेतन वितरण में भारी अनियमितताओं की बात भी सामने आई है। आरोप है कि स्थानीय मूल काश्तकार परिवारों और उनके परिजनों को, जो वर्षों से संस्थान में सेवाएं दे रहे थे, बिना उचित कारण सेवा से बाहर कर दिया गया।

ग्रामीणों का कहना है कि जिन परिवारों की भूमि संस्थान निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई थी, उन्हीं परिवारों के सदस्यों को लंबे समय तक संस्थान में रोजगार दिया जाता रहा। लेकिन वर्तमान प्रशासन ने कथित रूप से उन्हें हटाकर बाहरी लोगों को लाभ पहुंचाया। स्थानीय लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि नेपाल मूल के बाहरी व्यक्तियों को सरकारी नौकरी देकर स्थानीय युवाओं के अधिकारों की अनदेखी की गई।

संयुक्त जांच समिति ने की जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी प्रशांत आर्य ने अपर जिलाधिकारी, खेल अधिकारी और कोषाधिकारी की संयुक्त जांच समिति गठित की थी। जांच के दौरान संस्थान प्रशासन को कई बार नोटिस जारी किए गए, लेकिन संस्थान ने रक्षा मंत्रालय का हवाला देते हुए जवाब देने से बचने का प्रयास किया।

इसके बाद करीब 60 पन्नों की विस्तृत जांच रिपोर्ट शासन और खेल निदेशालय को भेजी गई।

फर्जी भर्तियां और करोड़ों के निर्माण कार्यों पर सवाल

जांच में यह भी आरोप सामने आए हैं कि संस्थान में नियमों के विरुद्ध प्रमोशन दिए गए और कुछ कर्मचारियों को मनमाने तरीके से वेतन लाभ पहुंचाया गया। इसके अलावा संस्थान में हुए निर्माण कार्यों और बिल्डिंग वर्क में भी गंभीर वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे हैं।

आरोप है कि करोड़ों रुपये के निर्माण कार्य बिना विधिवत टेंडर प्रक्रिया अपनाए कराए गए, जिससे सरकारी नियमों और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शासनादेशों और मुख्य सचिव के निर्देशों की कथित अनदेखी ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है।

ग्रामीणों में आक्रोश, आंदोलन की चेतावनी

मामले को लेकर उत्तरकाशी के ग्रामीणों और बेरोजगार युवाओं में भारी नाराजगी देखी जा रही है। स्थानीय सामाजिक संगठनों ने मामले की उच्चस्तरीय जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।

Parvatjan Team
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