तपोवन एसटीपी प्रकरण: संचालन एजेंसी पर ₹6.16 लाख का अर्थदण्ड, ब्लैकलिस्ट की संस्तुति

टिहरी गढ़वाल, 30 जून 2026। रिपोर्ट – विशन सिंह कंडारी  ऋषिकेश के तपोवन स्थित 3.5 एमएलडी सीवेज शोधन संयंत्र (STP) से कथित रूप से बिना उपचारित सीवेज गंगा नदी में छोड़े जाने के मामले में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल नितिका […]

टिहरी गढ़वाल, 30 जून 2026। रिपोर्ट – विशन सिंह कंडारी 

ऋषिकेश के तपोवन स्थित 3.5 एमएलडी सीवेज शोधन संयंत्र (STP) से कथित रूप से बिना उपचारित सीवेज गंगा नदी में छोड़े जाने के मामले में जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए जिलाधिकारी टिहरी गढ़वाल नितिका खण्डेलवाल के निर्देश पर जांच कराई गई, जिसके बाद एसटीपी के संचालन की जिम्मेदार एजेंसी पर ₹6.16 लाख का अर्थदंड लगाया गया है। साथ ही एजेंसी को ब्लैकलिस्ट करने की संस्तुति भी शासन को भेज दी गई है।

सोशल मीडिया वीडियो से खुला मामला

हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें तपोवन स्थित एसटीपी के आउटलेट से बिना उपचारित दूषित जल गंगा नदी में बहता हुआ दिखाई देने का दावा किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी ने तत्काल उत्तराखंड जल संस्थान, गंगा इकाई ऋषिकेश से विस्तृत रिपोर्ट तलब की।

जांच में सामने आई यह वजह

उत्तराखंड जल संस्थान के अधिशासी अभियंता की रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ दिनों में ग्रेविटी पाइपलाइन के जरिए अत्यधिक रसायनयुक्त सीवर का पानी एसटीपी तक पहुंचा, जिससे संयंत्र के दोनों एसवीआर (SVR) टैंकों का जैविक कल्चर पूरी तरह निष्क्रिय हो गया।

रिपोर्ट में बताया गया कि एसटीपी के संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी संभाल रही मैसर्स इकोटेक इंजीनियरिंग को जैविक कल्चर दोबारा विकसित करने के निर्देश दिए गए थे, लेकिन संचालन में लगातार अनियमितताएं मिलने पर प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई करते हुए कंपनी पर ₹6.16 लाख का जुर्माना लगाया।

ब्लैकलिस्ट करने की शासन को भेजी गई संस्तुति

जिला प्रशासन ने संबंधित एजेंसी मैसर्स इकोटेक इंजीनियरिंग को भविष्य की सरकारी निविदाओं से वंचित करने और उसे ब्लैकलिस्ट करने की संस्तुति भी शासन को भेज दी है।

इसके साथ ही संयंत्र में जैविक प्रक्रिया को दोबारा सुचारू करने के लिए छह सदस्यीय तकनीकी टीम को एसटीपी पर तैनात किया गया है।

प्रशासन के अनुसार, फिलहाल आगामी दो महीनों तक एसटीपी का संचालन किसी अन्य कंपनी के माध्यम से कराया जाएगा। इसके बाद नई निविदा प्रक्रिया पूरी होने पर नियमों के अनुसार चयनित एजेंसी को संयंत्र का संचालन सौंपा जाएगा।

एक टैंक में शुरू हुआ जैविक कल्चर, दूसरे में जल्द होगा सक्रिय

तकनीकी टीम की निगरानी में अब तक एक एसवीआर टैंक में जैविक कल्चर सफलतापूर्वक विकसित हो चुका है, जबकि दूसरे टैंक में भी अगले दो से तीन दिनों के भीतर जैविक प्रक्रिया सामान्य होने की संभावना जताई गई है।

जिलाधिकारी नितिका खण्डेलवाल ने उप जिलाधिकारी नरेंद्रनगर आशीष घिडियाल को एसटीपी के संचालन, शोधन प्रक्रिया और आउटलेट की नियमित मॉनिटरिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में गंगा नदी में बिना उपचारित सीवेज छोड़े जाने जैसी घटना दोबारा नहीं होनी चाहिए और किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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