देहरादून: उत्तराखंड परिवहन विभाग में कथित अवैध वसूली का मामला सामने आने के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। ट्रांसपोर्ट कारोबारियों से हर महीने उगाही के आरोपों में घिरे परिवहन विभाग के सब इंस्पेक्टर शशिकांत तेंगोवाल को निलंबित कर दिया गया है। मामले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विभाग ने तत्काल कार्रवाई की।
जानकारी के मुताबिक, सोमवार को सब इंस्पेक्टर हर्रावाला क्षेत्र में पहुंचे थे। इसी दौरान स्थानीय लोगों और ट्रांसपोर्ट कारोबारियों ने उन्हें घेर लिया। आरोप है कि वह लंबे समय से वाहन संचालकों से अवैध वसूली कर रहे थे।
गुस्साए लोगों ने उन्हें एक दुकान के अंदर बंद कर दिया और करीब दो घंटे तक बाहर नहीं निकलने दिया। घटना के दौरान मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई।
छोटे से बड़े वाहनों तक तय था ‘रेट’
स्थानीय ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का आरोप है कि छोटे व्यावसायिक वाहनों से प्रति गाड़ी दो हजार रुपये तक लिए जाते थे। वहीं बड़े वाहनों के लिए अलग-अलग रकम तय थी। छह टायर वाहन से ₹8 हजार.आठ टायर वाहन से ₹10 हजार और 12 टायर वाहन से ₹12 हजार तक वसूली का आरोप है ,लोगों का कहना है कि यह कथित वसूली पिछले चार वर्षों से लगातार चल रही थी।
वायरल वीडियो से मचा हड़कंप
घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होते ही परिवहन विभाग के अधिकारियों में हड़कंप मच गया। मामला शासन स्तर तक पहुंचा, जिसके बाद परिवहन सचिव ने पूरे प्रकरण का संज्ञान लिया।
मंगलवार को विभागीय अधिकारियों की बैठक हुई। शुरुआती जांच में आरोप गंभीर पाए जाने पर आरोपी सब इंस्पेक्टर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।
अपर परिवहन आयुक्त की ओर से निलंबन आदेश जारी कर दिए गए हैं। विभाग का कहना है कि मामले की विस्तृत जांच की जा रही है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
उठ रहे बड़े सवाल
- क्या परिवहन विभाग में लंबे समय से चल रहा था वसूली का खेल?
- चार साल तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
- क्या अन्य कर्मचारी और अधिकारी भी जांच के दायरे में आएंगे?




