नैनीताल उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश रवीन्द्र मैठाणी ने आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी की अवमानना याचिका की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। यह देश के न्यायिक इतिहास का एक रिकॉर्ड बन गया है क्योंकि अब तक चतुर्वेदी से जुड़े मामलों की सुनवाई से 15 न्यायाधीश स्वयं को अलग कर चुके हैं।
आदेश में कारण का उल्लेख नहीं
न्यायमूर्ति रवीन्द्र मैठाणी ने 26 सितंबर को आदेश पारित करते हुए कहा कि यह मामला किसी अन्य पीठ को सौंपा जाए, जिसमें वे सदस्य न हों। आदेश में अलग होने का कोई कारण दर्ज नहीं किया गया, जिससे यह घटनाक्रम और भी असामान्य हो गया है।
पहले भी कई न्यायाधीश हट चुके हैं
संजीव चतुर्वेदी के मामलों से अब तक दो सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश, तीन हाईकोर्ट जज, दो निचली अदालतों के न्यायाधीश और कैट (केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण) के आठ जज, जिनमें एक अध्यक्ष भी शामिल हैं, खुद को अलग कर चुके हैं।
- फरवरी 2024: नैनीताल हाईकोर्ट के जस्टिस मनोज तिवारी
- मई 2023: हाईकोर्ट के जस्टिस राकेश थपलियाल
- नवंबर 2013: सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस रंजन गोगोई
- अगस्त 2016: सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस यू.यू. ललित
इस साल चौथी बार हुआ रिक्यूजल
केवल 2025 में ही यह चौथा मौका है जब किसी न्यायिक अधिकारी ने खुद को चतुर्वेदी मामलों से अलग किया।
- फरवरी 2025: कैट के जज हरविंदर ओबेरॉय और बी. आनंद
- अप्रैल 2025: एसीजेएम नेहा कुशवाहा
- सितंबर 2025: हाईकोर्ट के जस्टिस रवीन्द्र मैठाणी
पहले भी हुई है सख्त टिप्पणी
2018 में नैनीताल हाईकोर्ट ने आदेश दिया था कि चतुर्वेदी से जुड़े सेवा मामलों की सुनवाई केवल नैनीताल सर्किट बेंच में ही हो। उस समय केंद्र सरकार पर 25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने बरकरार रखा।
क्यों है मामला चर्चा में
आईएफएस अधिकारी संजीव चतुर्वेदी कई भ्रष्टाचार मामलों का खुलासा कर चुके हैं और उन्होंने कई वरिष्ठ नेताओं व नौकरशाहों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। यही वजह है कि उनके मामलों में न्यायाधीशों का बार-बार खुद को अलग करना न्यायिक जगत और राजनीतिक हलकों में चर्चा का बड़ा विषय बना हुआ है।



