RTI खुलासा: उत्तराखंड की जेलों में क्षमता से दोगुने कैदी! नैनीताल-अल्मोड़ा जेल सबसे ज्यादा ओवरलोड

काशीपुर। शांत प्रदेश माने जाने वाले उत्तराखंड की जेलों में बंद कैदियों को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। सूचना के अधिकार (RTI) के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार राज्य की आधे से अधिक जेलों में उनकी निर्धारित क्षमता से कहीं अधिक कैदी बंद हैं। कई जेलों में तो स्थिति ऐसी है कि वहां क्षमता से दोगुने तक कैदी रखे गए हैं।

हालांकि राहत की बात यह है कि वर्ष 2025 की तुलना में 2026 में प्रदेश की जेलों में बंद कुल कैदियों की संख्या में कमी दर्ज की गई है।

RTI से सामने आई जेलों की असली तस्वीर

काशीपुर निवासी सूचना अधिकार कार्यकर्ता नदीम उद्दीन ने महानिरीक्षक कारागार, उत्तराखंड से राज्य की सभी जेलों की स्वीकृत क्षमता और वर्तमान बंदियों की संख्या से संबंधित जानकारी मांगी थी।

कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवा विभाग उत्तराखंड द्वारा 23 फरवरी 2026 को उपलब्ध कराई गई सूचना में जेलों की स्थिति का विस्तृत विवरण दिया गया।

नैनीताल जेल में क्षमता से लगभग दोगुने कैदी

RTI के अनुसार सबसे ज्यादा दबाव जिला कारागार नैनीताल पर है। यहां 71 कैदियों की क्षमता के मुकाबले 141 कैदी बंद हैं, यानी जेल लगभग दोगुनी क्षमता पर चल रही है।

वहीं जिला कारागार अल्मोड़ा में 102 क्षमता के मुकाबले 189 कैदी बंद हैं, जो क्षमता का करीब 185 प्रतिशत है।

देहरादून और हल्द्वानी जेलों की स्थिति भी गंभीर

राजधानी की देहरादून जेल भी भारी दबाव में चल रही है। यहां 580 कैदियों की क्षमता के मुकाबले 911 कैदी बंद हैं।

इसी तरह उपकारागार हल्द्वानी में 675 क्षमता के मुकाबले 1025 कैदी बंद हैं।

उत्तराखंड की सबसे अधिक ओवरलोड जेलें

जेलक्षमताबंद कैदी
जिला कारागार नैनीताल71141
जिला कारागार अल्मोड़ा102189
जिला कारागार देहरादून580911
उपकारागार हल्द्वानी6751025
केंद्रीय कारागार सितारगंज552772
उपकारागार रुड़की244298

खुली जेल में सबसे कम कैदी

सूचना के अनुसार सबसे कम कैदी सम्पूर्णानंद शिविर (खुली जेल) सितारगंज में बंद हैं। यहां 300 क्षमता के मुकाबले केवल 56 कैदी मौजूद हैं।

इसके अलावा जिला कारागार चमोली और पौड़ी में भी क्षमता से कम बंदी दर्ज किए गए हैं।

RTI में सामने आया कि वर्ष 2025 में उत्तराखंड की जेलों में कुल 5521 कैदी बंद थे, जबकि 2026 में यह संख्या घटकर 4812 रह गई है। यानी एक वर्ष में 765 कैदियों की कमी आई है।

हालांकि कैदियों की संख्या घटने के बावजूद कई जेलों में ओवरक्राउडिंग की समस्या अभी भी गंभीर बनी हुई है।

जेलों में बढ़ती भीड़ बनी चुनौती

विशेषज्ञों का मानना है कि जेलों में क्षमता से अधिक कैदी होने से सुरक्षा, स्वास्थ्य और व्यवस्थाओं पर दबाव बढ़ता है। इससे कैदियों के पुनर्वास और सुधार संबंधी योजनाओं पर भी असर पड़ता है।

उत्तराखंड की जेलों में लगातार बढ़ रही भीड़ अब कारागार प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है।

Parvatjan Team
Parvatjan Team
Parvatjan Team is dedicated to delivering the latest, accurate, and reliable news from Uttarakhand. We cover local issues, administrative updates, public interest stories, and breaking news in a clear and simple manner.

📢 खबरों को सबसे पहले पाने के लिए पर्वतजन को फॉलो करें

👉 WhatsApp Channel Join करें 👉 WhatsApp Group Join करें 📲 App Download करें

Related Posts