वाणिज्य कर विभाग में कर्मचारियों का टोटा

उत्तराखंड राज्य के लिए सबसे अधिक आय सृजित करने वाला बिक्री कर विभाग कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। वर्ष २०१० से विभाग में समूह ग व घ की भर्ती न होना इसका मुख्य कारण है। महेशचन्द्र पंत/रुद्रपुर उत्तराखंड के लिए सबसे अधिक आय सृजित करने वाला बिक्री कर विभाग कर्मचारियों की कमी से […]

उत्तराखंड राज्य के लिए सबसे अधिक आय सृजित करने वाला बिक्री कर विभाग कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। वर्ष २०१० से विभाग में समूह ग व घ की भर्ती न होना इसका मुख्य कारण है।

महेशचन्द्र पंत/रुद्रपुर

उत्तराखंड के लिए सबसे अधिक आय सृजित करने वाला बिक्री कर विभाग कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। वर्ष २०१० से विभाग में समूह ग व घ की भर्ती न होना इसका मुख्य कारण है।
मार्च २०१६ तक अधिकारी वर्ग के ४१४ पदों के सापेक्ष ३०२ पदों पर अर्थात ७३ प्रतिशत अधिकारी कार्यरत हैं, जबकि कर्मचारियों के १५३७ पदों के सापेक्ष ४१४ पदों अर्थात केवल ३२ प्रतिशत कर्मचारी ही कार्यरत हैं। जिनमें आउटसोर्सिंग उपनल व संविदा के कर्मचारी भी सम्मिलित हैं। जिससे हालत ऐसे बन गए हैं कि तीन अधिकारियों के लिए एक ही कर्मचारी उपलब्ध है। कर्मचारियों पर कार्य का अत्यधिक दबाव है। संवेदनशील कार्य भी संविदा कर्मचारियों से करवाए जा रहे हैं।
वाणिज्य कर विभाग में कर्मचारियों को चार समूहों क, ख, ग व घ में बांटा गया है। समूह क व ख अधिकारी वर्ग, समूह ग लिपिक श्रेणी तथा समूह घ चतुर्थ श्रेणी में आते हैं। समूह क के रिक्त पदों को समूह ख से पदोन्नति देकर भरा जाता है। शेष ५० प्रतिशत पदों पर लोक सेवा आयोग के माध्यम से सीधी भर्ती की जाती है।
नई नियमावली से दिक्कत
उत्तराखंड में वर्ष २००८ तक बिक्री कर विभाग की अपनी सेवा नियमावली थी। जिसके अंतर्गत रिक्त पदों पर वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति कर दी जाती थी, लेकिन १ जून २०११ को उत्तराखंड सरकार ने एक नई नियमावली जारी कर दी। जिसमें समूह ग के पदों यथा कनिष्ठ सहायक से मुख्य प्रशासनिक अधिकारी तक बीच के सभी पदों पर पदोन्नति के लिए नीचे के पदों में समय बाध्यता लागू कर दी। जिसके तहत कनिष्ठ सहायक से वरिष्ठ सहायक बनने के लिए ६ वर्ष की सेवा, वरिष्ठ सहायक से मुख्य सहायक ५ वर्ष (कुल सेवा १० वर्ष), मुख्य सहायक से प्रशासनिक अधिकारी के लिए ३ वर्ष (कुल सेवा १७ वर्ष), प्रशासनिक अधिकारी से वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी २ वर्ष सेवा (कुल सेवा २० वर्ष) पूर्ण होने पर ही पदोन्नति दी जा सकती है। ऐसे में कनिष्ठ सहायक को वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के पद पर १६ वर्षों में पदोन्नत हो जाना चाहिए था, लेकिन कुल सेवाकाल की बाध्यता ने जगह-जगह बैरियर लगा दिए।
ऐसे में कई महत्वपूर्ण पद रिक्त हैं। इसी कारण वर्तमान में प्रशासनिक अधिकारी पद शून्य है। कुल सेवाकाल की बाध्यता समाप्त कर देने से रिक्त पदों को भरा जा सकता है।
राजस्व वसूली पर असर
इन्हीं कारणों से वाणिज्य कर विभाग में हजारों करोड़ रुपए के राजस्व की वसूली नहीं हो पा रही। वित्त व बिक्री कर विभाग तेजतर्रार अनुभवी नेत्री इंदिरा हृदयेश के पास होने के बावजूद उदासीनता है, तब अन्य विभागों की स्थिति क्या होगी, यह समझा जा सकता है।
उपनल आउटसोर्सिंग व संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण व पदोन्नति, समूह ग पदों पर शीघ्र सीधी भर्ती करने, पदोन्नति में समय बाध्यता समाप्त करने अथवा वाणिज्य कर विभाग के अपनी नियमावली को ही बहाल रखने आदि मामलों में त्वरित निर्णय सरकार लेगी, ऐसा विश्वास है, ताकि आय के मुख्य स्रोतों से जुड़े वाणिज्य कर विभाग को चुस्त-दुरुस्त बनाया जा सके।
राजस्व संग्रह कार्यों में तेजी लाने व दिए गए लक्ष्यों को पूरा करने के लिए विभाग व अधिकारियों पर दबाव बनाने से पूर्व उनको संसाधन संपन्न बनाया जाना आवश्यक है। तभी उपलब्धियों को सार्थक बनाया जा सकता है। वैसे भी बिना फौज व हथियारों के जंग नहीं जीती जाती।

ऐसे बन गए हैं कि तीन अधिकारियों के लिए एक ही कर्मचारी उपलब्ध है। कर्मचारियों पर कार्य का अत्यधिक दबाव है। संवेदनशील कार्य भी संविदा कर्मचारियों से करवाए जा रहे हैं।

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