…तो न्यायालय की अवमानना पर चलेगा मुकदमा

उच्चतम न्यायालय के आदेश के बावजूद भी उत्तराखंड सरकार न्यायालय के आदेश का पालन नहीं करवा रही है। जाहिर है ऐसे में न्यायालय की अवमानना का मुकदमा सरकार को झेलना पड़ सकता है। पर्वतजन ब्यूरो राज्य में ऐसे कई कर्मचारी-अधिकारी हैं, जो उच्चतम न्यायालय की अवमानना कर आरक्षण के आधार पर उच्च पदों पर विराजमान […]

उच्चतम न्यायालय के आदेश के बावजूद भी उत्तराखंड सरकार न्यायालय के आदेश का पालन नहीं करवा रही है। जाहिर है ऐसे में न्यायालय की अवमानना का मुकदमा सरकार को झेलना पड़ सकता है।

पर्वतजन ब्यूरो

राज्य में ऐसे कई कर्मचारी-अधिकारी हैं, जो उच्चतम न्यायालय की अवमानना कर आरक्षण के आधार पर उच्च पदों पर विराजमान हैं। इनको कायदे से बहुत पहले पदावनत हो जाना चाहिए थे, किंतु सरकार के साथ ऐसे कार्मिकों की सांठ-गांठ से ये लोग नियम विरुद्ध उच्च पदों पर बने हुए हैं। यदि न्यायालय के आदेश का पालन किया जाएगा तो तकरीबन ५ हजार कार्मिकों की पदावनति तय है। पेयजल निगम के मुख्य अभियंता भजन लाल ने सैकड़ों ऐसे कार्मिकों की फाइल दबा रखी है, जिन्हें अब तक रिवर्ट हो जाना चाहिए था। भजन लाल ने इस फाइल को इसलिए बंद कर रखा है, क्योंकि भजन लाल स्वयं प्रमोशन में आरक्षण के कारण मुख्य अभियंता बने हैं। जाहिर है, सबसे पहले न्यायालय की गाज भजन लाल पर ही पड़ेगी। भजन लाल की तरह एडीबी योजना की सड़क बनाने वाले मुख्य अभियंता संतराम हैं। इन्हें तो उत्तर प्रदेश शासन के लोक निर्माण अनुभाग के प्रमुख सचिव ने पदावनत करने का लिखित आदेश दे दिया है। इनकी पदोन्नति अविभाजित उत्तर प्रदेश के समय में हुई थी। २७ अप्रैल २०१२ को उच्चतम न्याायालय ने स्पष्ट आदेश दिया था कि १५ नवम्बर १९९७ के पश्चात आरक्षण के आधार पर पदोन्नत कार्मिकों को पदावनत कर दिया जाए। पदावनत कार्मिकों को उनके नए पदावनत पद का ही वेतनमान अनुमन्य होगा, परंतु राज्य में आज तक ऐसी कोई कार्यवाही नहीं हुई है, जिससे सरकार न्यायालय की अवमानना के दोष में कटघरे में खड़ी प्रतीत होती है।
राज्य में लोक निर्माण विभाग के एडीबी योजना में मुख्य अभियंता के पद पर विराजमान संतराम पर पदावनति की गाज गिरने वाली है। इसके लिए बाकायदा उत्तर प्रदेश शासन के लोक निर्माण विभाग अनुभाग से प्रमुख सचिव किशन सिंह अटोरिया ने एक आदेश पारित किया है। जिसमें हरिहर प्रसाद, नारायण राम, उमा शंकर, रामानन्द राम, मूलचन्द्र और संतराम को अधीक्षण अभियंता के वर्तमान पदनाम से पदावनत कर अधिशासी अभियंता के पद पर नियुक्त करने को कहा गया है।
ठीक ऐसे ही राज्य में भी दिसम्बर २०१५ को अपर सचिव अरविंद सिंह ह्यांकी ने ललित मोहन एवं दिलीप सिंह नबियाल को अधीक्षण अभियंता से पदावनत करने तथा राजेश चंद्र को अधिशासी अभियंता से पदावनत व बीपी नौटियाल, केएस असवाल, जगमोहन सिंह चौहान एवं अन्य को सहायक अभियंता से पदावनत करने के संबंध में प्रत्यावेदन दिया था।
न्यायालय की अवमानना के संबंध में उत्तराखंड अधिकारी कर्मचारी शिक्षक संघर्ष मोर्चा के मुख्य संयोजक डीसी नौटियाल ने जनवरी २०१६ को मुख्य सचिव को अवगत कराया है, परंतु इस पर आज तक कोई कार्यवाही न होना शासन को न्यायालय के आदेशों के प्रति संवेदनहीनता को दर्शाता है।

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